‘विंध्याचल माई की जय। का हालचाल बा। माई के सेवकों को प्रधान सेवक कऽ प्रणाम बा’। कुछ इसी अदा से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंदईपुर की सभा में लोगों से मुखातिब हुए। उन्होंने लोगों को मन को छूने की ‘भोजपुरिया बानी और मुद्दे स्थानीय’ की संवाद शैली अपनाकर लोगों रिझाने की कोशिश की।
पीएम ने ‘बालू, ईंट, गिट्टी बहुत कुछ बा इहां’ कहकर इशारा किया यहां वह सब है, जो विकास के लिए जरूरी है। इसके बावजूद विकास नहीं हुआ। भटौली व चुनार के पुल, मिर्जापुर के लाल पत्थर और पीतल उद्योग की बरबादी का जिक्र कर स्थानीय भावनाओं को तो सहलाया ही विरोधियों की खबर लेने का मौका भी निकाल लिया। भटौली पुल का जिक्र करते हुए मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के हालिया विवाद की ओर तो बिना कुछ कहे इशारा किया ही प्रदेश सरकार के विकास के मुद्दे को बेमानी करार दिया। अखिलेश के विकास की कहानी यहां के पत्थर बयां कर रहे हैं कहकर महीने तरीके से तंज किया तो मायावती ने तो यहां के पत्थरों को राजस्थान का बताकर अपनी मंशा जता दी थी कि वह मिर्जापुर को किस रूप में देखती हैं कहकर सीधे हमला बोला।
भटौली पुल लगभग 11 साल से बन रहा है। निर्माण में देर से जनता में गुस्सा है। प्रधानमंत्री ने इस फीडबैक का बेहतरीन उपयोग सभा में किया। यह भी कहा कि यही पुल सैफई में बन रहा तो क्या इतने साल लगते। और यह भी कहा कि पिता ने शिलान्यास किया था बेटे का फर्ज था उस काम को पूरा करता लेकिन मुख्यमंत्री नेे ऐसा नहीं किया। विंध्यवासिनी मंदिर, जल प्रपात, प्राकृतिक सुषमा का जिक्र कते हुए कहा कि यह इलाका पर्यटन केंद्र बन सकता है लेकिन सूबे की सरकारों को इसकी चिंता ही नहीं थी।
पर्यटन का विकास होता तो फूल वाला और टेंपो वाले तो कमाएंगे ही और चाय वाले की भी आमदनी बड़ेगी। चाय वाले की कमाई की बात सुनकर भीड़ से हंसी सुनाई तो प्रधानमंत्री को तसल्ली हो गई कि जो वह इशारों में कह रहे हैं, उसे भी लोग बखूबी समझ रहे हैं। भाषण को स्थानीय पुट देने के फेर में बरैनी को बरेली, चुनार को चुनाव और औराई को औरैया बोल गए लेकिन इससे बातों के प्रवाह पर असर नहीं पड़ा। भ्रष्टाचार, जातिवाद, क्षेत्रवाद पर हमला बोलते हुए आखिर में अपने विकास के एजेंडे को सबके सामने रखा।