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भटौली पुल ने ढहाया ‘नीला किला’

Sun, 12 Mar 2017 12:37 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला/ मिर्जापुर
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मतगणना में जुटे कर्मचारी
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मझवां का ‘नीला किला’ इस चुनाव में ढह गया। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी रहे रमेशचंद्र बिंद यहां से अजेय बने हुए थे। भटौली का पुल इसी क्षेत्र में जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभा में सपा और बसपा सरकारों की विफलता का स्मारक करार दिया था।  

रमेशचंद्र बिंद तीन बार से इस क्षेत्र के विधायक रहे। लगभग 11 साल पहले इस पुल का शिलान्यास मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में हुआ था। उसके बाद बसपा की सरकार बनी। रमेशचंद्र बिंद उस समय बसपा के विधायक थे लेकिन उनके कार्यकाल में पुल का काम एक इंच आगे नहीं बढ़ा। वर्ष 2012 में सपा की सरकार आ गई। उसके बाद वे सरकार नहीं होने की बात कहकर असमर्थता जताते रहे। क्षेत्र में सड़कों की हालत भी बहुत अच्छी नहीं रही है। पुल के निर्माण नहीं होने और सड़कों की बदहाली का खामियाजा यहां से सपा और बसपा दोनों के ही प्रत्याशियों को भुगतना पड़ा है। भाजपा के जीत के बाद लोगों में आस बंधी है कि यह पुल जल्द ही पूरा हो जाएगा।
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वर्ष 2012 में रमेश चंद्र बिंद ने रिकार्ड 83870 मत प्राप्त हुए थे। जब सपा की लहर चल रही थी तो उन्होंने सपा के राजेन्द्र प्रसाद को पराजित किया था। इसके पूर्व वर्ष 2007 के चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवशंकर सिंह यादव को लगभग पांच हजार वोटों से पराजित किया था। वर्ष 2002 में रमेशचंद्र बिंद ने पहली बार मझवां विधानसभा सीट पर किस्मत आजमाया था। तब उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व सिंचाई मंत्री पंडित लोकपति त्रिपाठी को शिकस्त दी थी। उन्होंने तब 46146 मत मिले थे जबकि लोकपति त्रिपाठी को महज 29852  वोट। इस बार इस सीट से जीत दर्ज करने वाली सुचिस्मिता मौर्य के ससुर रामचंद्र मौर्य ने भी वर्ष 1996 में बीजेपी के टिकट पर बसपा के दिग्गज नेता भागवत पाल को पराजित किया था। 
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