महानिशा को विंध्य क्षेत्र के अष्टभुजा पहाड़ पर दूरदराज से आए साधक तंत्र और मंत्र की सिद्धि में तल्लीन दिखाई दिए। मां तारा देवी, कीनाराम दरबार, मोतिया तालाब, गेरुआ तालाब, सीताकुंड, नंदजा देवी, भैरव कुंड और घने जंगलों में पूरी रात साधकों का जमावड़ा रहा।
विंध्यवासिनी को 10 महाविद्या का केंद्र माना जाता है। नवरात्र में इनकी सिद्धि के लिए श्रीयंत्र पर बसे विंध्यधाम में जुटते हैं। महाअष्टमी को मां का निशा पूजन वाम मार्ग व दक्षिण मार्ग विधि से किया गया।
मदिरा, मांस व मंत्र से पूजा हुई। बलि भी दी गई। शिवपुर में गंगा किनारे तांत्रिक पूरे दिन तंत्र साधना में जुटे रहे। विंध्य क्षेत्र के गुप्त स्थानों पर भी तांत्रिक साधनारत दिखे।