जिला ऑनलाइन एफआईआर के मामले में काफी पीछे चल रहा है। इसमें कभी नक्सल प्रभावित रहे अहरौरा और अदलहाट थाने फिसड्डी साबित हुए हैं। काफी प्रयास के बाद भी क्राइम कंट्रोल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम भी प्रभावी साबित नहीं हो पा रहा है। इंटरनेट की समस्या पहाड़ी क्षेत्रों में बने थानों में ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने में परेशानी का सबब बने हुए हैं। बीटीएस लगने के बावजूद इन इलाकों में नेट की गति काफी धीमी है ऐसे मे इन थानों में रजिस्टर पर ही मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
बीएसएनएल की केबिलों का कटना भी अहम कारण है जिससे संचालन व्यवस्था आए दिन भंग ही रहती है। अहरौरा और अदलहाट थाने इस मामले में काफी पीछे हैं। कई थानों पर तैनात पुलिसकर्मी तकनीकी मामले में दक्ष नहीं हैं जिसके कारण समस्याएं आ रही हैं। अब एक से डेढ हजार मामले ही ऑनलाइन दर्ज हुए हैं। अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद मिश्र ने ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करने के साथ ही उसकी प्रति वादी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया है कि वे वादियों को बिना मतलब थानों के चक्कर न लगवाएं।
इस मामले में अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद मिश्र का कहना है कि ऑनलाइन मुकदमे दर्ज करने के मामले में मिर्जापुर प्रदेश की रैंकिंग में 15 वें स्थान पर है। संबंधित कर्मचारियों को और ट्रेनिंग दे कर इसमें और सुधार करने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि शासन ने ऑनलाइन मुकदमों की संख्या में बढ़ोत्तरी करने का फरमान सुनाया है ताकि पीड़ितों को बिना किसी झंझट के अपनी बात पुलिस तक पहुंचाने में कामयाबी मिल सके।