बेचूबीर बाबा के मेले का समापन हुआ। तीन दिवसीय अंतरप्रांतीय मेले में हजारों भक्तों ने हाजिरी लगाई और आशीर्वाद मांगा। विदाई के समय मनरी के थाप की गूंज हुई इसके साथ बाघ की चिंघाड़ भी की गई। भक्तों ने जयकारा लगाया।
मिर्जापुर में प्रबोधिनी एकदशी पर अहरौरा क्षेत्र में मंगलवार की भोर चार बजे जैसे ही मनरी नामक वाद्य यंत्र की थाप गूंजी श्रद्धालुओं ने जयकारे के साथ आंखों में आंसू लेकर भीगी पलकों से बाबा को विदा किया और बेचूबीर बाबा के तीन दिवसीय अंतरप्रांतीय मेले का समापन हो गया। प्रेत बाधा निवारण और संतान प्राप्ति की इच्छा की आस लेकर देश के विभिन्न स्थानों से आए श्रद्धालु अपने-अपने घरों को लौट गए।
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पुलिस तथा प्रशासन ने भी सकुशल मेला संपन्न होने पर राहत की सांस ली। रात में बेचूबीर बाबा के पुजारी बृजभूषण यादव नदी में स्नान करने गए और वहां से स्नान के बाद विभिन्न देवी देवताओं की पूजा एवं हवन करने के दौरान एकादशी की भोर हाथ मे लाठी लिए दौड़ते हुए बाबा की चौरी पर चढ़ कर मत्था पटक दिया और परंपरागत ढंग से बेचूबीर बाबा की पूजा की इसी बीच घंटा घड़ियाल के साथ मनरी के थाप की आवाज वातावरण मे गूंजने लगी।
चौरी के सामने हजारों की संख्या में पुरुष एवं महिलाए बाबा का दर्शन पाने एवं पूजा देखने के लिए जमें रहे। पूजा होने के बाद पुजारी ने अक्षत प्रसाद के साथ श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया और भक्तजन बेचूबीर बाबा की चौरी पर मत्था टेक कर अपने अपने दिलों में अपनी मनोकामना पूर्ण होने की आस लिए घरों को लौट गए।