मिर्जापुर। साइबर अपराध दिन प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है। उसके तरीके भी बदल रहे हैं। साइबर अपराधियों पर कार्रवाई करने के लिए अलग से हेल्प डेक्स और थाना बन गया है, इन साइबर अपराधियों से बचाव तभी हो सकता जब आप जागरूक रहें। साइबर अपराधी जॉब देने के नाम पर भी ठगी कर रहे हैं। सतर्क रह कर ही इनसे बचा जा सकता है।
परिक्षेत्रीय साइबर थाना के उप निरीक्षक डा. चंद्रशेखर यादव ने बताया कि साइबर अपराधियों को मुख्य उद्देश्य पैसा है। इसके लिए साइबर अपराधी अलग-अलग हथकंडे अपना रहे हैं। जिससे की लोग उनके मंसूबों को न समझ सके। इसलिए जरुरी है कि सर्तक और जागरुक रहे। बैंक संबंधी किसी भी व्यक्तिगत जानकारी, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता नंबर, ओटीपी किसी को न दें न किसी लिंक पर क्लीक करें।
इन सब के अलावा साइबर अपराधी इस समय नए तरीके अपना रहे हैं। जिसके जाल में लोग फंस जा रहे है। इसमें फेसबुक, व्हाट्सएप आदि के जरीए हनी ट्रैप में लोगों को फंसाकर वीडियो काल करते हैं। अश्लील वीडियो बनाकर उसको वायरल करने की धमकी देते हैं। इज्जत की डर के चलते लोग एकाउंट में पैसा दे रहे है। दूसरा पार्ट टाइम जाब का लालच देकर ठगी कर रहे है। इसमें कुछ टारगेट पुरा करने पर एकाउंट में पैसा दिया जाता है। फिर बड़ा टारगेट पुरा न कर पाने की बात बताकर पैसा मंगाते हैं। लालच देते है। अब अगला टारगेट पुरा करने पर दोगुना पैसा मिलेगा। इस तरफ ठगी की जा रही है। इसके अलावा विभिन्न कंपनियों की फर्जी वेबसाइट के जरीए एजेंसी दिलाने के नाम पर ठगी की जा रही है। एजेंसी लेने के लिए लोग पैसे दे दे रहे है।
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केस-वन
फेसबुक पर अंजान महिला मित्र दोस्ती करेगी। फिर मैसेंजर पर बात करते हुए वीडियो सेक्स करने की बात कहकर व्हाट्सएप नंबर मांगती है। इसके बाद व्हाट्सएप पर वीडियो काल कर अश्लील वीडियो की स्क्रीन रिकार्डिंग करती है। इसके बाद उस वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पैसे ऐठती है। जिले में कई लोग इसके शिकार हो चुके हैं। इसलिए किसी अंजान से वीडियो काल न करें
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केस-दो
नगर निवासी तन्यम जैन ने कार की एजेंसी लेने के लिए उसकी वेबसाइट पर जाकर अप्लाई किया। जहां एजेंसी देने के नाम पर अलग-अलग प्रक्रिया को पुरा करने के लिए 47 लाख रुपये खाते में डलवाए गए। तब जाकर पता चला कि वह कार एजेंसी की फर्जी वेबसाइट थी। जिसे साइबर ठगों ने बनाया था। मामले में साइबर टीम ने तीन आरोपियों को पकड़ा।
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इस तरह किया जा रहा है साइबर फ्राड
- एप से लोन देने के नाम पर
-गेम में टारगेट पुरा करने के नाम पर
-अश्लील वीडियो काल करके
- पार्ट टाइम जाॅब देने के नाम पर
-बच्चों में गेम की लत लगवाकर
-ओएलएक्स के पाम पर
-एनी डेक्स अपलोड कराकर
-फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर पैसे मांगना
-कंपनी की फर्जी वेबसाइट बनाकर
-केवाईसी अपडेट करने के नाम पर
-आनलाइन गेम में बोनस जीतने के नाम पर
-पैसो दोगुना करने के नाम पर
-टावर लगाने के नाम पर
-आनलाइन जीवनसाथी चुनने के नाम पर
-क्रेडिट कार्ड से बोनस के नाम पर
-बिजली कटने के नाम पर
साइबर के शिकार हो तो यहां जाएं
-हर थाने पर साइबर हेल्प डेक्स है।
-1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर पर काल करें
-पांच लाख से अधिक का फ्राड है तो शहर कोतवाली में स्थित परिक्षेत्रीय साइबर थाने पर शिकायत करें।
साइबर फ्राड से बचने के लिए सोशल मीडिया एकाउंट को लाक रखें। अंजान से बात न करें। बैंक संबंधी और निजी जानकारी किसी से साझा न करें। किसी अंजान लिंक पर क्लीक न करें। साइबर के फ्राड के शिकार हो तो साइबर थाने में या हेल्पाइनल नंंबर 1930 पर शिकायत करें।
श्याम बहादुर यादव, प्रभारी, परिक्षेत्रीय साइबर थाना