मिर्जापुर। नगर सहित ग्रामीण अंचलों में रविवार को गणेश चौथ धूमधाम से मनाई गई। महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर विघ्नहर्ता भगवान गणेश का पूजन अर्चन किया।
भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गणेशजी की पूजा के साथ-साथ श्री कृष्ण और गायों का पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री कृष्ण और गणेश का पूजन करने से संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रती को बल, बुद्धि, विद्या और धन-धान्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्याताओं का हवाला देते हुए ज्योतिषाचार्य डा. रामलाल त्रिपाठी ने बताया भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन भगवान गणेश की उपासना के साथ ही गौ माता की भी उपासना की जाती है। ज्योतिषाचार्य ने कहा बहुला चतुर्थी के दिन गाय माता की पूजा और सेवा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश और चंद्र देव की उपासना करने से जीवन में आने वाल सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाता हैं।
विकास खंड क्षेत्र के रामपुर रेक्सा स्थित प्राचीन गणेश मंदिर में गणेश चौथ पर दर्शन हेतु निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं व भक्तों का ताँता लगा रहा । अगल बगल की महिलाओं का जत्था चंद्रोदय पर चंद्रमा को अर्घ भी मंदिर परिसर में देकर गणेश जी का दर्शन पूजन कर जलपान करेंगी । गणेश भक्तों में संतोष तिवारी बताते है कि गणेश भगवान की स्थापना कोई नही जानता ये वर्ष 1960 के सूखे में देखे गए थे । इसके पूर्व यहां पानी भरा होता था सूखे में पानी सूखा तो विशाल काय प्रतिमा दिखाई पड़ी थी । इनके मंदिर निर्माण में प्रयागराज हाटा निवासी भागीरथी चौधरी ने मंदिर बनवा दिया । उन्होंने कहा गणेश जी के दर्शन मात्र से भक्त को हर कठिन कार्यों का रास्ता मिल जाता है । मंदिर परिसर में महा शिवरात्रि पर दंगल, लोकगीत के साथ तीन दिवसीय विशाल मेले का आयोजन भी होता है ।