मिर्जापुर। यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन के दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत शुक्रवार को बैंकों के शटर गिरे रहे। इससे पहले दिन दो सौ करोड़ रुपये का क्लीयरिंग प्रभावित रही। हड़ताल के पहले दिन समस्त बैंक शाखाओं के कर्मियों ने अपनी आवाज बुलंद की। गिरजाशंकर सिंह की अध्यक्षता में इलाहाबाद बैंक डंकीनगंज स्थित शाखा पर धरना-प्रदर्शन के साथ नारेबाजी किया।
जिला संयोजक सुरेश पांडेय ने कहा कि बैंककर्मी हड़ताल नहीं करना चाहते हैं, सरकार हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य करती है। कहा कि हड़ताल के दौरान बैंककर्मी अपना उस दिन का वेतन तक कटवा देते हैं। जिला संयोजक ने कहा कि पिछले तीन वर्षो से बैंककर्मियों के जायज मांगों को केंद्र सरकार नजरंदाज करती चली आ रही है। उन्होंने कहा बैंको का मर्जर एवं एनपीए का बहाना बनाकर सरकार सकारात्मक वार्ता नहीं करना चाहती है। अध्यक्षता करते गिरजाशंकर सिंह ने कहा दो दिवसीय हड़ताल के बावजूद सरकार न चेती तो मार्च एवं अप्रैल महीनें में फिर से बैंककर्मी तीन दिवसीय हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इस दौरान धनंजय राय, जगदीश उपाध्याय, प्रशांत त्रिपाठी, शशिशेखर पांडेय, अवध किशोर राय, रौशन कुमार, राजीव रंजन, धनेश्वर तिवारी, श्रीकांत शर्मा, लक्ष्मी नारायण, शिवेंद्र प्रताप सिंह, मनीष तिवारी आदि मौजूद रहे।
रैली निकालकर बैंक कर्मियों विभिन्न शाखाओं पर रखी नजर
दो दिवसीय हड़ताल के दौरान शुक्रवार को यूनाइटेड फोरम बैंक यूनियन के तत्वावधान में बैंककर्मियों ने रैली निकाल बैंको पर नजर रखी। इस दौरान स्टेट बैंक, विजया बैंक, सिंडीकेट बैंक, एचएफडीसी बैंक, इंडेन बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, बंधन बैंक, आईडीबीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, सेंट्रल बैंक, एक्सिस बैंक आदि बैंको का भ्रमण कर नजर रखते हुए पुन: डंकीनगंज स्थित इलाहाबाद बैंक शाखा पहुंचे।
दो दिन और झेलनी पड़ेगी उपभोक्ताओं को परेशानी
अपने विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे बैंककर्मियों के चलते उपभोक्ताओं को अभी दो दिन तक परेशानी झेलनी पड़ेगी। शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय हड़ताल के बाद अगले दिन रविवार होने के कारण वैसे ही बैंक बंद रहेंगे। जमा व निकासी को लेकर शुक्रवार को खाता धारक परेशान रहे।
जानकारी के अभाव में कई उपभोक्ताओं में शामिल महिला और पुरुष बैंको तक चक्कर लगाकर गिरे शटर देख वापस लौटने को मजबूर रहे।नगर के विभिन्न इलाको में स्थित एटीएम मशीनों के गेट पर भी ताला लटकता रहा। जिससे लोग चौखट तक पहुंचकर मायूस रहे। पैसे के अभाव में लोगों के जरुरी से जरूरी कार्य प्रभावित रहे। कई तो एक दूसरे से उधार आदि लेकर किसी तरह से अपना काम चलाया।