विंध्य दरबार क्षेत्र रविवार को पूरे दिन जल परी श्रद्धा शुक्ला के नाम से गूंजता रहा। रविवार को सायं चार बजे विंध्याचल के पक्काघाट से माता की ओढ़नी को सिर माथे से लगा कर श्रद्धा ने अगले पड़ाव मिर्जापुर के कचहरी घाट के लिए प्रस्थान किया तो उसकी हौसला आफजाई के लिए हुजूम उमड़ पड़ा था। गंगा में तैरती श्रद्धा हाथ उठा कर अभिवादन करती आगे बढ़ती गई। सायं सात बजे के करीब कचहरी घाट पर पहुंची तो पूरा इलाका हर्ष ध्वनि से गूंज उठा।
श्रद्धा ने सायंकाल चार बजे पक्काघाट से आगे की यात्रा शुरू की। उसके स्वागत के लिए लोगों का रेला उमड़ पड़ा था। दीवानघाट, कंतित घाट, ओझला पुल, लल्लाघाट, नारघाट, संकठाघाट, पक्काघाट, दाऊजी घाट, बदलीघाट, बरियाघाट एवं कचहरीघाट हर जगह लोग जल परी का स्वागत करने के जुट गए थे। गंगा में जैसे-जैसे श्रद्धा का काफिला बढ़ रहा था, स्थानीय लोगों की नावें उसमें जुड़ती जा रही थी। पक्का घाट से आगे यह संख्या सौ के पार हो गई। विंध्याचल के पक्काघाट पर मिट्ठू मिश्र के नेतृत्व में भीड़ ‘श्रद्धा बेटी को मां विंध्यवासिनी का आशीर्वाद’ तथा ‘काशी विश्वनाथ का दम बोलो हर हर बम बम बोलो’ से पूरा पक्काघाट गुंजायमान रहा।
गोताखोर राजकुमार श्रीमाली उसके साथ विंध्याचल से कचहरी घाट तक उसका उत्साह बढ़ाते रहे। जगह-जगह उसके स्वागत को भीड़ उमड़ी। कचहरी घाट पर पहुंचने के बाद श्रद्धा का पड़ाव हो गया और सोमवार को सुबह वह अगले पड़ाव वाराणसी के लिए प्रस्थान करेगी। श्रद्धा के साथ तैराक राहुल सैनी और मोहित निषाद एवं एक चिकित्सक सहित 11 सदस्यीय टीम भी चल रही है। श्रद्धा ने कहा कि दादा मुन्नू लाल की प्रेरणा से वह इस कठिन लक्ष्य पर निकली है और उसे पूरा करके ही दम लेगी।