लोकसभा चुनाव के बाद हासिए पर चली गई अपना दल (एस) से भाजपा का रिश्ता बरकरार रहेगा। विधानसभा उपचुनाव में भाजपा ने प्रतापगढ़ सीट अपना दल के लिए छोड़कर ना केवल गठबंधन को तवज्जो दी है, बल्कि अपने दूसरे साथियों को भी संदेश दिया है। पिछले दिनों प्रदेश मंत्री मंडल विस्तार के बाद से उहापोह में चल रहे अपना दल के कार्यकर्ताओं में भी गठबंधन को लेकर विश्वास मजबूत होगा।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही अपना दल (एस) और भाजपा के रिश्तों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। विधानसभा चुनाव में अपना दल के खाते में गई प्रतापगढ़ सीट पर होने वाले उपचुनाव पर प्रत्याशी चयन को लेकर राजनीतिक लोगों की निगाह टिकी थी। सूत्रों का कहना है कि अपना दल यह मान रही थी कि अगर समझौते के लिए उसे प्रतापगढ़ सदर की सीट नहीं मिली तो इसका सियासी संदेश खराब जाएगा।
ऐसी स्थिति में पार्टी के लिए अपना बचाव करना मुश्किल होगा। केंद्र और राज्य मंत्रिमंडल में अपना दल (एस) को जगह नहीं मिलने से बेचैनी है। इसके अलावा भाजपा अपना दल के बेस वोट को अपने पाले में करने के लिए राज्य में कुर्मी बिरादरी को महत्वपूर्ण पद दे रही है, इससे भी पार्टी में चिंता है। यहां बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा ने अपना दल को केंद्रीय मंत्रिमंडल से दूर रखते हुए अनुप्रिया पटेल को मंत्री नहीं बनाया।