मिर्जापुर। चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर चंद्रयान-3 के लैंडिंग होते ही भारत ने इतिहास रच दिया। इस मिशन में मिर्जापुर जिले के युवा वैज्ञानिक आलोक कुमार पांडेय भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। आलोक और उनके साथियों ने लैंडिंग और कम्यूनिकेशन की जिम्मेदारी संभाली। पिता संतोष पांडेय ने पुत्र आलोक से फोन पर हुई वार्ता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मिशन के शत प्रतिशत सफल होने के लिए तीन दिन से लांचिंग सेंटर में ही काम करते रहे और घर नहीं लौटे।
सेना से सेवानिवृत्त संतोष पांडेय ने बताया कि बुधवार को सुबह पुत्र आलोक का फोन आया। उसने मां विंध्यवासिनी को प्रणाम करने के बाद हमसे और माता से आशीर्वाद मांगा। फिर दूसरे दिन बात करने की बात कहकर चला गया। उन्होंने कहा कि इस मिशन के सफल होने की उन्हें बहुत खुशी है। उन्होंने कहा कि जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान। आलोक कुमार पांडेय इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक हैं। इनके पिता संतोष कुमार पांडेय मार्कोस कमांडो रह चुके हैं। आलोक मार्स मिशन 2014 में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उत्कृष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार पा चुके हैं। इसी प्रकार चंद्रयान दो की लांचिंग में भी महत्वपूर्ण निभा चुके हैं। इसके साथ ही कई वैज्ञानिक मिशन में अपना सहयोग दे चुके हैं। उनकी टीम पिछले कई महीने से दिन-रात इस मिशन में लगी हुई थी। मिशन की सफलता के बाद आलोक के घर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। लोगों ने उनके पिता संतोष पांडेय को मिठाई खिलाकर बधाई दी। हर कोई मिर्जापुर के लाल आलोक की सफलता पर गर्व करता दिखा।