विन्ध्याचल। कथावाचक मोरारी बापू ने काली खोह मोड़ के पास आयोजित हो रहे श्रीरामकथा मानस श्रीदेवी के दूसरे दिन मां और रामनाम की महिमा का बखान किया। कहा कि कलियुग में राम नाम के सहारे भवसागर पार किया जा सकता है। तुलसीदास ने जब हनुमान जी से पूछा कि आप ने सागर कैसे पार किया तो उन्होेंने कहा कि राम नाम के सहारे। उन्होंने कहा कि उसी तरह हर स्त्री मां का रूप है। संगीतमय कथा में बापू जब मानस की चौपाइयां गाने लगते हैं तो पूरा पंडाल उनके सुर में सुर मिलाने लगता है।
मोरारी बापू ने कहा कि शक्तिपीठ से शक्ति ही प्राप्त होगी, शांति नहीं। शक्ति से जटिलता प्राप्त होगी सरलता नहीं। जड़-चेतन तथा सभी स्त्रियों में मां का ही रूप व्याप्त है। कहा गया है कि ‘स्त्री समस्ता सकला जगता’ का अर्थ है, संसार की सभी स्त्रियां मां का ही स्वरूप हैं। विंध्य धाम प्राचीन काल से ऊर्जा का केंद्र है। यहां दस महाविद्या विद्यमान है। मानस भी एक देवी हैं, जिसके पास दस महाविद्या है। पुण्य के कई रूप हैं। कथा सुनो वह पुण्य है, दया करो यह भी पुण्य है। शंकर मत के अनुसार संसार में पुण्य के दो स्वरूप ही हैं। एक पुण्य देने वाला और दूसरा पाप हरने वाला। रामचरित मानस मेें कहा गया है कि जगत में एकमात्र पुण्य विप्र की पूजा है। शारीरिक श्रम जरूरी है क्योंकि मृत्यु का दूसरा रूप आलस्य है। साधना गुरू के सानिध्य में करनी चाहिए। पूजा का मतलब चंदन लगाना नहीं बल्कि ब्रह्मण सेवा है। ब्राहमण का धर्म है पढ़ना- पढ़ाना। उन्हें पहले दान देना चाहिए और तब लेना चाहिए।
अविवेक ने कराया तुरंत दर्शन
बापू ने कहा कि कल जब मां विंध्यवासिनी मंदिर प्रांगण गया तो वहां विवेकी भक्त भक्त कड़ी धूप में दर्शन के लिए इंतजार कर रहे थे। मुझे अविवेक के कारण क्षण भर में दर्शन हो गया।
मोहब्बत में आज दिल घबरा रहा
बापू ने भक्त और भगवान के संबंधों की व्याख्या करने के लिए मिर्जा गालिब का प्रसंग सुनाया। कहा कि गालिब को मदीना भेजा जा रहा था तो उन्होंने कहा कि मै वहां के नियम नहीं जानता। खैर एक शिष्यों ने उनके जाने की व्यवस्था करा दी तो किसी ने गालिब से पूछा कि आप कैसा महसूस कर रहे हैं। उन्होेंने एक शेर में जवाब दिया, ‘मोहब्बत में आज दिल घबरा रहा है, तसव्वुर हुआ जा रहा है, यूं तो यहां से कोसों दूर है मदीना, लेकिन मदीने का दीदार मुझे यहीं से हो रहा है।’