विकास खंड जमालपुर स्थित अहरौरा बांध में वर्तमान समय में महज 17 फीट पानी ही उपलब्ध है, जबकि क्षेत्र के 22 हजार एकड़ खेतों में धान की नर्सरी की रोपाई होनी है। किसान इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर उनकी धान की रोपाई कैसे हो पाएगी। किसानाें का मानना है कि जनप्रतिनिधियों की अदूरदर्शी नीतियों के चलते जमालपुर के किसानों को कभी बाढ़ की विभीषिका तो कभी सूखे की मार झेलना पड़ता है।
आलम यह है कि वर्तमान समय में किसानों की धान की नर्सरी रोपाई के लिए लगभग तैयार है, लेकिन बांध में कम पानी होने से एवं प्रकृति द्वारा रोजाना आंख मिचौली का खेल खेले जाने से किसान चिंतित हैं। बता दें कि वर्ष 1954 में जब अहरौरा बांध का निर्माण तत्कालीन सिंचाई मंत्री स्व. कमलापति त्रिपाठी द्वारा कराया गया तो किसानों में उम्मीद जगी थी कि अब उनकी सिंचाई समस्या दूर हो जाएगी।
वर्षों से कभी सूखा तो कभी बाढ़ की मार झेल रहे किसानों को खेती-किसानी करने में असुविधा का सामना करना पड़ रहा था। बांध के निर्माण वर्ष के एक दशक बाद बांध से कई झील, नदी-नाले, राजवाहा एवं माइनरों का निर्माण हो जाने से बांध के जल क्षमता को बढ़ा दिया गया, लेकिन बांध की ऊंचाई नहीं बढ़ाई गई। किसान विगत तीन दशक से बांध की ऊंचाई सौ फीट कराए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं।
जमालपुर क्षेत्र को बाढ से निजात दिलाने व समुचित सिंचाई व्यवस्था कराने के वादे के साथ चुनार विधायक जगतंबा सिंह पटेल चुने गए। यह संयोग है कि सूबे में सपा की सरकार है, लेकिन जमालपुर क्षेत्र को न तो बाढ़ से निजात दिलाने व सिंचाई के समुचित साधन की व्यवस्था ही की गई।
इस संबंध में सिंचाई खंड अहरौरा के अवर अभियंता विपिन कुमार गुप्ता ने बताया कि अभी बांध में महज 17 फीट पानी है और रोपाई का कार्य शुरू नहीं हुआ है। प्रकृति मेहरबान हो गई तो बांध में पर्याप्त मात्रा में पानी हो जाएगा।