आखिरकार 38 साल बाद बाणसागर परियोजना का पानी इलाके में मार्च महीने तक पहुंच जाएगा। लापरवाही, बाधाओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की बाधाओं को पार करते हुए नगर तैयार हो गई है। मिर्जापुर के ददरी गांव से मेजा बांध में पानी देने का कार्य शुरू होने जा रहा है। इस पानी से मिर्जापुर और इलाहाबाद के 1.5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई हो सकेगी।
तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 14 मई 1978 को बाणसागर परियोजना का शिलान्यास किया था। तब इस पर 322.30 करोड़ की लागत का अनुमान था। नहर और सोन नदी पर बांध निर्माण कार्य धीमी गति से चला। कई तरह की बाधाएं आईं। इस कारण नहर के निर्माण की लागत 3200 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
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परियोजना मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से समझौते से चलाई जा रही है। इस बहुद्देशीय परियोजना से तीनों प्रांत के किसानों को सिंचाई के लिए पानी देना था। वर्तमान में मध्यप्रदेश और बिहार में सिंचाई हो रही है। अब परियोजना का पानी उत्तर प्रदेश पहुंचने वाला है। मार्च में नहर में पानी आने का दावा किया जा रहा है। इससे मिर्जापुर व इलाहाबाद के किसानों को लाभ मिलेगा। दोनों जिलों में 1.5 लाख हेक्टेयर खेेत की सिंचाई होगी। उम्मीद की जा रही है इससे इलाके को सूखे से राहत मिलेगी, उपज भी बढ़ेगी और किसान खुशहाल होंगे।
अधीक्षण अभियंता बाणसागर मंडल दो गोपीचंद ने कहा किमार्च माह में किसानों को हर हाल में मेजा बांध से बाणसागर का पानी मिलने लगेगा। नहर निर्माण कार्य पूरा होने के कगार पर है। सभी कार्य मार्च के पहले पूरा करा लेने का लक्ष्य है। जिससे किसानों को मार्च में पानी दिया जा सकेगा।