धरने में भारी संख्या में शामिल शिक्षामित्र ।
प्रदेश सरकार से वार्ता विफल होने के बाद शिक्षामित्रों ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। शिक्षामित्रों ने दस हजार रुपये मानदेय और मूल विद्यालय में पोस्टिंग के सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने सरकार पर वादाखिलाफी का लगाया आरोप लगाया। शिक्षामित्रों के धरना प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट में सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया गया था।
संयुक्त समायोजित शिक्षक शिक्षा मित्र संघर्ष मोर्चा के तत्वावधान में शिक्षामित्रों ने धरना दिया। धरने को संबोधित करते हुए अध्यक्ष अजयधर दूबे ने कहा कि प्रदेश के शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद का समायोजन निरस्त होने से शिक्षामित्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया। उनके समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। सुनील सिंह पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षामित्रों की समस्या के समाधान हेतु 15 दिन का समय लिया गया था और वादा किया था कि शिक्षामित्र विद्यालयों में शिक्षण कार्य करें, समस्या का विधिक समाधान अवश्य निकाला जाएगा। परंतु अब सरकार शिक्षामित्रों के साथ वादाखिलाफी कर रही है। मांडलिक मंत्री विनोद कुमार सरोज ने कहा कि भाजपा चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की समस्या के समाधान क ा चुनावी संकल्प भूल रही है। जिससे मजबूरन शिक्षामित्रों को सत्याग्रह आंदोलन का आगाज करना पड़ रहा है। आंदोलन का संचालन आदिशंकर दूबे ने किया। इस दौरान विनय सिंह, दिनेश, राम किशुन, राजकुमार, राजेश, कृपा शंकर आदि ने विचार व्यक्त किया। धरना प्रदर्शन के दौरान राजेश दूबे, राजेश मिश्रा, पारितोष, ब्रहमदेव, दुर्गा सिंह, दिलीप सिंह, राजा सिंह, राम गोपाल, विष्णु मिश्रा, अशोक यादव, महेश उपाध्याय, दिपेंद्र सिंह, संदीप, श्वेता, माधुरी, रीना, अनीता, कविता, शीला, मीना आदि मौजूद रहीं।