चिकित्सक के इंतजार में ओपीडी के बाहर बैठे मरीज। अमर उजाला
- फोटो : OPD patient sitting outside waiting for the doctor .
जिले की 25 लाख की आबादी के बीमारियों का इलाज के लिए जनपद में मौजूद सौ एमबीबीएस डाक्टर नाकाफी साबित हो रहे हैं। यही वजह है कि गंभीर बीमारियाें का इलाज कराने के लिए मरीजों को वाराणसी इलाहाबाद समेत अन्य बड़े शहराें की ओर दौड़ लगानी पड़ती है। जिसका नतीजा होता है कि मरीजों को पैसा तो पानी की तरह बहाना ही पड़ता है परेशानी भी उठानी पड़ती है।
बता दें कि मिर्जापुर जनपद की आबादी लगभग 25 लाख से अधिक है। यहां मंडलीय चिकित्सालय, एक महिला चिकित्सालय, आठ सीएचसी, 30 पीएचसी और लगभग 50 न्यू पीएचसी खोले गए हैं। जिला चिकित्सालय में लभगभ 30 डाक्टर समेत कुल सौ स्टाफ हैं। वहीं जिला महिला चिकित्सालय में भी लगभग 60 स्टाफ है।
सके अलावा जनपद में करीब 50 निजी चिकित्सालय हैं। फिर भी लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों में जाना पड़ता है। इसका एक मुख्य कारण विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ डाक्टरों का नहीं होना। वैसे तो जिले में सैकड़ों डाक्टर हैं, जो अपना क्लीनिक खोल कर मरीजों का इलाज करते हैं।
इसके अलावा मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जनपद के सरकारी अस्पतालों में भी डाक्टर तैनात किए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश चिकित्सकों के पास एमबीबीएस की डिग्री नहंीं है।
ऐसे चिकित्सकों से इलाज कराने पर मरीजों का सही इलाज नहीं हो पाता है। जब उनकी हालत गंभीर हो जाती है तो उनको बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता है या उन्हें भेज दिया जाता है।
बड़े शहरों में जाने पर मरीज के परिजनों को बताया जाता है कि अनुभव की कमी के चलते डाक्टर ने उनका सही इलाज नहीं किया है जिससे उनका मर्ज पकड़ में नहीं आया है।