मिर्जापुर। नगर के मुसफ्फरगंज स्थित केबीपीजी कॉलेज में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में सामुदायिक भवन में विचार गोष्ठी हुई।
वक्ताओं ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर विशेष जोर दिया। योग से संबंधित पुस्तकों के महत्व पर गहन चर्चा की। शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. ज्योतिश्वर मिश्र ने कहा कि योग की पुस्तकें विभिन्न आसनों और प्राणायामों के बारे में विस्तृत जानकारी देती है, जिससे योग का अभ्यास अत्यधिक सरल हो जाता है।
डॉ. कुलदीप पांडेय ने कहा कि स्वामी सत्यानंद सरस्वती द्वारा लिखित योग साधना गृहस्थ लोगों के लिए योग के अभ्यास पर व्यावहारिक और उपयोगी मार्गदर्शिका है। डॉ. प्रतिमा भारती ने कहा कि व्यस्त जीवनशैली से हम अक्सर शरीर, मन और मस्तिष्क को समय नहीं दे पाते हैं। लेकिन योग के पुस्तकों का अध्ययन हमारे मानसिक विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है। डॉ. अंबुज पांडेय ने कहा कि योग प्राचीन विद्या है। योग की पुस्तकें योग के इतिहास, विकास और विभिन्न पद्धतियों के बारे में विस्तृत जानकारी देती हैं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. रामदास ने कहा कि योग की पुस्तकें योग के आध्यात्मिक और मानसिक लाभों, जैसे कि शांति, ध्यान और तनाव कम करने के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। इन पुस्तकों के माध्यम से हम योग के वास्तविक उद्देश्य और लाभों को समझ सकते हैं। इस मौके पर डॉ. पीयूष कमल द्विवेदी, डॉ. रतन लाल, डॉ. अमर बहादुर सरोज आदि ने भी पुस्तकों के महत्व और योग के विभिन्न लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। संवाद