विंध्याचल। जगत जननी मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में माघी पूर्णिमा पर दर्शनार्थियों का रेला उमड़ पड़ा। इस दौरान विंध्यधाम में करीब पांच लाख से अधिक दर्शनार्थियों ने मत्था टेका। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर नगर मजिस्ट्रेट दया शंकर पांडेय, सीओ विंध्याचल श्वेता श्रीवास्तव और सीओ सिटी डा. एके राय सुबह से ही मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाने में जुटे रहे।
माता के पावन दरबार में मंगला आरती के बाद से ही दर्शनार्थियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। संगम में डुबकी लगाने के बाद विंध्यधाम पहुंचे भक्तों ने विधि-विधान पूर्वक माता का दर्शन-पूजन कर सुख-समृद्धि की कामना की। माता के चरण छूने पर प्रतिबंध लगने से दर्शन-पूजन करने में भक्तों को कम समय लगा। घंटों कतार में खड़े होने के बाद मंदिर पहुंचने पर किसी ने झांकी से तो किसी ने गर्भगृह में पहुंचकर दर्शन -पूजन किया।
इस दौरान विंध्याचल के पक्काघाट, दीवान घाट, बलुआ घाट, कच्चा घाट, इमली घाट पर स्नान करने के लिए स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। विंध्याचल की जैपुरिया गली, कोतवाली गली, न्यू वीआईपी, पुरानी वीआईपी, बच्चा पाठक गली में लगी लंबी कतार में खड़े दर्शनार्थी माता का जयकारा लगाते मंदिर की ओर बढ़ते जा रहे थे। विंध्यधाम में उमड़ी दर्शनार्थियों की भारी भीड़ के चलते सभी वाहन स्टैंड और धर्मशाला एवं होटल फुल रहे। भोजनालयों पर पर भी भारी भीड़ जुटी रही। मंदिर के सामने खोयापाया तो केंद्र बना था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से खोए लोगों के परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खोया पाया केंद्र से परिजन खुद माइक पर खोए हुए का नाम एनाउंस करते देखे गए। विंध्याचल में जगत जननी का दर्शन करने के उपरांत बड़ी संख्या में दर्शनार्थी अष्टभुजा और कालीखोह पहुंचकर मां काली व मां अष्टभुजा देवी का दर्शन किया।