छानबे। विकास खंड छानबे के अधिकांश तालाबों की तलहटियों से धूल उड़ रही है, लेकिन जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी लापरवाह बने हुए हैं। नहरों में पानी न छोड़े जाने के कारण तालाबों में पानी नहीं भरा जा रहा है। अगर दो चार तालाबों को छोड़ दिया जाए तो क्षेत्र के किसी भी तालाब में पानी नहीं है, जिसके कारण मवेशियों की प्यास तक नहीं बुझ पा रही है।
मालूम हो कि क्षेत्र में करीब 31 किलोमीटर लंबी नहर तथा 57 राजकीय नलकूप स्थापित किए गए हैं तथा इनके कमांड एरिया में लगभग 75 तालाबों में पानी भरा जा सकता है। तालाबों में पानी न भरे जाने की मुख्य वजह सिंचाई एवं विद्युत विभाग के अधिकारी व कर्मचारी ही रोड़ा बनना है। यदि नहरों एवं राजकीय नलकूपों से नदी-नालों एवं तालाबों में पानी भर दिया जाए तो पशु-पक्षियों सहित मवेशियों को भी काफी राहत मिल सकती है। जिलाधिकारी के आदेश के बावजूद अभी तक क्षेत्र के किसी भी नहर में पानी नहीं छोड़ा गया है।
इस संदर्भ में ग्राम प्रधानों का कहना है कि नहर अथवा नलकूप से तालाबों व नदी-नालों में पानी भरे जाने से कम खर्च आएगा तथा निजी नलकूपों से तालाबों में पानी भरवाए जाने से अधिक खर्च आयेगा और इसके भुगतान के लिए भी ग्राम प्रधानों के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। बता दें कि यदि क्षेत्र की नहरें चालू कर दी जाएं तो क्षेत्र के गोगांव, हरगढ़, भौरुपुर, चेहरा, बजटा, रसौली, सुमतिया, रन्नो पट्टी, गोनौरा, तिवारीपुर, सिहावल, यादवपुर, बिहसड़ा, सेमरी, धौरहरा, सर्रोई, जिगना, बिहसड़ा खुर्द, नदिनी, नीबी गहरवार, चड़ैचा, मनिकठी सहित कई ग्राम पंचायतों में कम खर्च में तालाबों में पानी भरा जा सकता है। ग्राम पंचायत भौरुपुर अजगना के आदर्श तालाब में निजी पंपिंग सेट द्वारा भले ही पानी भरवाया जा रहा है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है। ग्राम प्रधान वीरेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि बिजली की उपलब्धता न होने के कारण सही ढंग से तालाब में पानी नहीं भरा जा रहा। अगर नहरों को अविलंब चालू करवा दिया जाए तो सूखे पड़े तालाबों में पानी भरा जा सकता है। क्षेत्रीय नागरिकों एवं पशुपालकों ने तत्काल तालाबों में पानी भरवाने की मांग जिलाधिकारी से की है।