मिर्जापुर। विंध्याचल धाम में दर्शनार्थियों को दर्शन कराने के विवाद में पंडों में पहले भी खूनी भिड़ंत की घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें अब तक 16 से अधिक पंडों और उनके समर्थकों की हत्याएं हो चुकी हैं। पंडों में आपसी वर्चस्व की लड़ाई के साथ दूकानों पर प्रसाद खरीदने को लेकर भी कई बार मारपीट हो चुकी है। कई बार पंडों ने दर्शनार्थियों को भी पीटा है। सन 2007 में 14 दिसंबर की रात कालीखोह पर रह रहे मौनी बावा और उनके दो शिष्यों की हत्या कर दी गई थी। इसमें पुलिस ने कुछ पंडों को आरोपी बनाया था।
इतिहास बताता है कि विंध्याचल के पंडों के बीच झगड़ों में कई पंडों की हत्या हुई। इसमें वर्चस्व की लड़ाई और जमीन को लेकर विवाद था। चार दिसंबर, 2003 को विंध्याचल निवासी पंकज और पंचानंद के बीच दर्शनार्थियों को दर्शन कराने को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि मामला बढ़ने पर पंचानंद, भानू व वर्धन ने मिलकर न्यू वीआईपी पर मां विंध्यासिनी मंदिर के पास खड़े कमल और पंकज पाठक की गोली मार कर हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के बाद इलाके में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। काफी दिनाें तक यहां पुलिस की ड्ूयूटी लगी रही थी।
इस घटना के करीब दस वर्ष बाद वर्ष 2012 में लक्ष्मीनारायण पांडेय व प्रभु पांडेय के बीच जमीन को लेकर विवाद हो गया। दोनाें के बीच एक मकान पर कब्जे को लेकर कई दिनाें तक तकरार रही। आरोप है कि मकान के पास जैसे ही कुछ कार्य करने के लिए लक्ष्मीनारायण अपनी पत्नी आशा व बेटे विकास के साथ पहुंचे तभी प्रभु पांडेय ने फायरिंग करनी शुरू कर दी। इसमें लक्ष्मी नारायण की गोली लगने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी जबकि उनकी पत्नी आशा व बेटा आकाश गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके अलावा दूकानाें पर प्रसाद खरीदने को लेकर भी कई बार पंडाें के बीच मारपीट हो चुकी है।