छानबे। गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल संकट उत्पन्न होने लगा है। ग्रामीणों द्वारा पेयजल समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाना भी शुरू हो गया है। क्षेत्र के पठारी इलाके के गांवों में भूमिगत जलस्तर खिसकने से अधिकांश हैंडपंपों ने पानी उगलना भी बंद कर दिया है। इससे ग्रामीण पानी के लिए तरसने लगे हैं।
विकास खंड में पेयजल समस्या से निजात के लिए 3312 हैंडपंप लगवाए गए हैं, जिसमें से 735 हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं। खराब हैंडपंप रिबोर की बाट जोह रहे हैं। चुनाव आचार संहिता के कारण नए हैंडपंप लगना भी बंद हो गए हैं। क्षेत्र के कामापुर कला, अकोढ़ी, बिरोही, देवरी, अरंगी सरपत्ती, विजयपुर, महुआरी खुर्द, सोनवर्षा, तिखोर, दादर, कामापुर खुर्द, चतुरिया, बघेड़ा खुर्द, चितौली, बघेड़ा कला आदि ग्राम पहाड़ी से सटे हुए हैं। यहां पर स्थित कूप सूखने लगे हैं तथा अधिकांश हैंडपंप भी कीचड़युक्त पानी देने लगे हैं। गंगा के तराई वाले गावों में बबुरा, ऊंचडीह, जोपा, सुपंथा, निफरा, बभनी, नदिनी, नौगांव, झीलवर, गौरा, भिलगौर, दुगौली, नगवासी, मिश्रपुर आदि गावों में भूमिगत जलस्तर तेजी से खिसकने लगा है। ग्राम प्रधान संघ के अध्यक्ष शिवचंद्र मिश्र सहित ग्राम प्रधान मूलचंद यादव, शहनवाज खान, केशराज यादव, प्रेम बहादुर सिंह, बेचन सिंह, संतोषधर दूबे आदि का आरोप है कि प्रत्येक वर्ष खराब व रिबोर योग्य हैंडपंपों की सूची भेजी जाती है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो क्षेत्र में पेयजल की स्थिति और भी भयावह हो सकती है।