मिर्जापुर। जनपद में दूसरी बार धमकने के बाद सीबीआई मनरेगा के तहत होने वाले मत्स्य पालन के कार्यों का स्थलीय सत्यापन करेगी तो व्यापक पैमाने पर धांधली उजागर होगी। बता दें कि जनपद में वित्तीय वर्ष 2007-08 से लेकर 2009-2010 के बीच मत्स्य पालन के नाम पर 47 लाख 14 हजार 800 रुपये खर्च किए गए ।
मनरेगा के तहत उक्त तीनों वर्षाें में मत्स्य पालन के कार्यों पर पानी की तरह पैसा बहाया गया। मनरेगा योजनांतर्गत शुरुआत से ही सरकारी धनराशि का खूब बंदरबांट हुआ है। कई कार्यों में घोटाला तो उजागर हुआ, लेकिन कई में अनियमितता के बाद भी मामला उजागर नहीं हुआ है। विकास भवन की सूत्रों की मानें तो 2007 से लेकर 2010 तक जनपद में मत्स्य पालन के कार्य को लेकर पैसा पानी की तरह बहाया गया है। वित्तीय वर्ष 2007-08 से लेकर 2009-10 तक जिला प्रशासन द्वारा मत्स्य पालन का कार्य कराया गया। इसमें तालाबों की सफाई से लेकर पानी आदि की व्यवस्था किया जाना था। लेकिन सारे कार्य सिर्फ कागजातों पर होते रहे। 2009 व 2010 में 47 लाख 14 हजार रुपये मत्स्य पालन के कार्याें के लिए दे दिया गया। विकास भवन के सूत्रों की मानें तो इसमें काफी अनियमितता बरती गई है।
थोड़ा बहुत कार्य कराकर ही इति श्री कर दिया गया। एक स्थानों पर कई बार मत्स्य पालन का कार्य कराया दिखा कर धनराशि डकार ली गई है। अगर सीबीआई जांच करती है तो मत्स्य पालन के कार्यों में भी मनरेगा के धनराशि के दुरूपयोग का मामला सामने आ सकता है।