चुनार। पतित पावनी गंगा के तट नैनागढ़ की गोद में जन्मे क्रांतिकारी रचनाकार पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ की जयंती पर मौजी जियरा एसोसिएशन द्वारा साहित्य संत धाम बालू घाट पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय एकता कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन मंगलवार को किया गया। जिसमें पूर्वांचल के नामचीन रचनाकारों एवं कलम के सिपाहियों ने अपनी दमदार एवं हास्य व्यंग्य की चुटीली रचनाओं से समाज के हर पहलू पर करारा प्रहार कर श्रोताओं का मन जीत लिया। सम्मेलन के मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी दिवाकर सिंह और विशिष्ट अतिथि साहित्य प्रेमी कवि एसडीएम सदर डा. विश्राम रहे।
समारोह की शुरुआत नगर के दिवंगत साहित्यकार पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’, मास्टर चुनारी लाल, राम प्रसाद नीलम, अब्दुल हक चुनार के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मुख्य तथा विशिष्ट अतिथि द्वारा की गई। इस अवसर पर आयोजक समिति की ओर से नगर के वरिष्ठ रचनाकार बसंतलाल नयन को अंगवस्त्रम और माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। मुशायरे का आगाज राजकुमार राजन द्वारा प्रस्तुत वंदना ‘हर मानव का मन निर्मल करे दे, हे शारदे जन-जन की बुद्धि विमल कर दे’ से किया गया। इसके पश्चात मंच पर आए गजलकार निजाम वाराणसी ने देश के सैनिकों को समर्पित रचना ‘सरहद पर जाने वाले सपूतों को देखिए सर पे कफन और हथेली पर जान है। हिम्मत जवान रखिए खुदा मेहरबान है’ प्रस्तुत कर श्रोताओं के दिलों में देश प्रेम की अलख जगा दिया। इसके पश्चात अपनी रचना ‘उनकी आंख में ऐसा हुनर है मुझे मालूम न था। इसमें बिजली का असर था मालूम न था’ सुना कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। भोजपुरी रचनाकार विध्यांचल पांडेय ने देश के हालात का बखूबी चित्रण अपनी रचना ‘सुविधा शुल्क और महंगाई क्या इसलिए सरकार बनाई’ से किया। हेलाल मिर्जापुर ने ‘बढ़ाओ हाथ मोहब्बत का दोस्ती के लिए‘ पेश कर देश के नेताओं पर करारा व्यंग्य किया। इसके पश्चात एसडीएम सदर डा. विश्राम ने अपनी उम्दा रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। कवि सम्मेलन में बरेली के रमाकांत, अहमद आजमी आदि ने अपनी बेहतरीन रचनाएं व गीत गजल सुनाए। मुशायरे का संचालन समर गाजीपुर ने किया। अतिथियों का स्वागत आयोजन समिति की ओर से कुशवाहा दीप मौर्य ने किया।