मिर्जापुर। जिले में राइस मिलरों के पास 25 करोड़ रुपये का चावल डंप पड़ा है। पुराना चावल हटे तो शुरू हो धान की कुटाई। लेकिन एफसीआई उनके चावलों को नहीं खरीद रहा है। हालांकि इसके पीछे मिलर व एफसीआई अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। ऐसे में किसान अपनी धान आढ़तियों को औने-पौने दाम में बेचने को विवश हो रहे हैं।
जिले में धान खरीद के लिए जिला प्रशासन की ओर से 52 क्रय केंद्राें का निर्धारण किया गया है। लेकिन धान खरीद पर पानी फिरता दिख रहा है। अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 10 प्रतिशत ही धान की खरीद हुई है। जबकि जनपद में 65 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया है। वहीं राइस मिलर धान की कुटाई ठप कर दिए हैं। उनकी मानें तो अभी मिलरों के पास 25 करोड़ रुपये का चावल डंप पड़ा हुआ है। लेकिन एफसीआई के द्वारा 2013-14 के ही चावल खरीदने की बात की जा रही है। ऐसे हालात में मिलरों द्वारा धान न लेने से क्रय केंद्रों द्वारा किसानों के धान की खरीद न के बराबर की जा रही है। जिससे किसान आढ़तियों को औने-पौने दाम पर धान बेचने को विवश हो रहे हैं। अब पेच जो भी हो, राइस मिलर और एफसीआई के तर्क में फंस कर मात किसान ही खा रहे हैं।