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Mirzapur News: चार महीने में तीन चरणों की प्रक्रिया के बाद प्रवेश के लिए भटक रहे 98 अभ्यर्थी

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कछवां के 15 लाभार्थियों का एक निजी विद्यालय में अब तक नहीं हो सका प्रवेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। जिले में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए तीन चरणों में आवेदन और लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के चार माह बाद भी 98 लाभार्थियों का निजी स्कूलों में प्रवेश नहीं हो सका है। लाभार्थी अभी भी प्रवेश के लिए भटक रहे हैं। इनमें से 15 लाभार्थी अकेले कछवां क्षेत्र के हैं, जहां लॉटरी में चयनित होने के बावजूद संबंधित संस्थान में प्रवेश नहीं हो रहा है।
लॉटरी में चयनित लाभार्थियों के अभिभावकों का आरोप है कि जब वे प्रवेश के लिए संबंधित स्कूल पहुंचे तो वहां उन्हें बताया गया कि संस्थान अल्पसंख्यक है, इसलिए वहां प्रवेश नहीं हो सकता। तीनों चरणों में 9,479 आवेदन मिले थे, इनमें से केवल 1,916 आवेदकों को विद्यालय आवंटित हो सका। शेष 7,563 आवेदन या तो लॉटरी में चयनित नहीं हुए या छोटी-मोटी त्रुटियों के कारण निरस्त कर दिए गए।
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इनसेट
799 स्कूलों में 50000 सीटें उपलब्ध
योजना के तहत जिले में 5,000 सीटें उपलब्ध हैं। योजना के लिए जिले के 799 विद्यालयों की मैपिंग की गई है। इन विद्यालयों में दुर्बल वर्ग के आवेदकों को छात्र संख्या के आधार पर 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई योजना का लाभ दिया जाना है। प्रथम चरण में 5,770 आवेदन मिले, जिनमें से 1,153 का चयन हुआ। दूसरे चरण में 2,363 आवेदन आए, जिनमें से 368 को विद्यालय आवंटित किए गए। तीसरे एवं अंतिम चरण में 1,346 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 395 अभ्यर्थियों का चयन निजी विद्यालयों के लिए किया गया।
वर्जन
कछवां के 15 लाभार्थियों का प्रवेश कराया जा रहा है। इसके अलावा जिन अन्य लाभार्थियों का प्रवेश लंबित है, उनका नाम किसी न किसी कक्षा में पहले से प्रदर्शित हो रहा है। इसकी जांच कराई जा रही है।
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अनिल कुमार वर्मा, बेसिक शिक्षा अधिकारी, मिर्जापुर

थोड़ी-सी त्रुटि भी आवेदन निरस्त होने का कारण बनती है
लाभार्थी छात्रों के परिजनों ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन करते समय स्थान, नाम और पिता के नाम जैसी प्रविष्टियां सावधानीपूर्वक भरनी होती हैं। यदि इनमें थोड़ा भी अंतर होता है तो आवेदन निरस्त हो सकता है। इसके अलावा यदि कोई विद्यालय अधिक मांग वाला है तो अधिकांश अभिभावक उसी का विकल्प भरते हैं लेकिन सीटें सीमित होने के कारण कुछ ही को आवंटन मिल पाता है। अन्य विकल्प नहीं होने पर आवेदन आगे नहीं बढ़ पाता। यदि आवेदक के घर के पास विद्यालय होने के बावजूद वार्ड अलग है तो आवेदन निरस्त हो सकता है। नाम की वर्तनी या पते में अंतर होने पर भी आवेदन निरस्त हो जाता है। इसलिए आवेदन करते समय इन सभी बिंदुओं का विशेष ध्यान रखने तथा अपने वार्ड के विद्यालय का ही चयन करने की सलाह दी गई है।
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