मिर्जापुर। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आवाहन पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने फतहां स्थित मुख्य अभियंता वितरण के कार्यालय पर दो से शाम पांच बजे तक कार्य बहिष्कार कर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान सभी ने प्रदेश सरकार की ओर से प्रदेश के पांच शहरों वाराणसी, मुरादाबाद, गोरखपुर, मेरठ तथा लखनऊ की विद्युत व्यवस्था का निजीकरण करने के फैसले का विरोध किया। कहा कि सरकार के इस फैसले से आम जनता का काफी नुकसान होगा।
सभा में अधिकारियों ने कहा कि पांच शहर की बिजली व्यवस्था का निजीकरण किया जा रहा है। उन शहरों में सरकार ने जनता का अरबों रुपये लगा कर विद्युत व्यवस्था में विद्युत वितरण प्रणाली को मजबूत किया है। यहीं नहीं इन शहरों में राजस्व वसूली का थ्रू रेट भी लगातार सुधर रहा है। इसके बाद भी इन शहरों को पूंजीपतियों के हाथों में देने से जहां एक तरफ पूंजीपतियों को बिना किसी निवेश के लाभ कमाने का मौका मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ किसानों एवं जनता को बिजली महंगी मिलेगी। कहा कि ग्रामीणों क्षेत्रों में खास कर किसानों को अभी तक काफी सस्ते दर पर बिजली दी जा रही थी। जिसके फलस्वरूप प्रदेश में हरित क्रांति आयी। बिजली विभाग को निजीकरण करने से लोगों को महंगी बिजली तो मिलेगी ही उनका शोषण भी बढ़ जाएगा। इस दौरान मुख्य अभियंता तारिक मतीन, अधीक्षण अभियंता रजत जुनैजा, इंजीनियर निसार अंसारी, सुभाष यादव, गिरीश, अधिशासी अभियंता यदुनाथ राम, एके सिंह, इंजीनियर मनोज यादव, डीएन प्रसाद, रामनरेश, अवधेश मिश्रा, अमर सिंह, एसके सरोज, लक्ष्मी शंकर, चंद्रबली, आदि मौजूद रहे।