चुनार। तहसील चुनार के तहत ईंट भटठों से निकलने वाली धुएं से सबसे अधिक प्रदूषण फैल रहा हैं। संस्था के सदस्यों ने बताया कि उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के हालात पर संस्था द्वारा एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की गई है यह रिपोर्ट 100 प्रतिशत अभियान के तहत जुटाए गए 14 जिलों के वायु प्रदूषण के आंकड़ों पर आधारित है। जिसमें जनपद से लिए गए आकड़े भी शामिल हैं। उक्त बातें क्लाइमेट एजेंडा संस्था के सदस्य रवि कुमार ने नगर स्थित पांडेय बेचन शर्मा उग्र पुस्तकालय एवं वाचनालय में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा। वहीं सचिवालय प्रभारी सानिया अनवर ने केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किए जाने वाले वायु गुणवत्ता जांच का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों के वायु प्रदूषण का अध्यन कर जारी की जाने वाली अब तक की पहली प्रदेश आधारित रिपोर्ट है। एयर किल्स नामक यह रिपोर्ट यह बताती है कि वायु प्रदूषण के श्रोतों को चिन्हित किया जाना और सख्ती से खत्म किया जाना अब जरूरी हो गया। सरकार द्वारा वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए शहर आधारित जो भी प्रयास किये जा रहे हैं। उनका विस्तार प्रादेशिक स्तर तक करना जरूरी है संस्था द्वारा प्रदेश के 40 गैर वायु गुणवत्ता निगरानी वाले जिलों एवं शहरों में वायु गुणवत्ता आकड़े एकत्रित करने वाली मशीनें लगवाई गई है जो नियमित प्रदूषण का आंकडा बताती हैं। वायु प्रदूषण के खतरे को देखते हुए इस मशीन को नरायनपुर के निर्मल गांव बरेवा में भी लगाया जाएगा। पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदीप शुक्ला ने बताया कि मिर्जापुर में ईट भटठों की बढती संख्या और मानकों का पालन न किया जाना, कचरा जलाना साथ ही विभिन्न निर्माण कार्य आदि वायु में जहर घोल रहा है। अनियंत्रित निर्माण कार्य, क्षतिग्रस्त सड़कों से उड़ती धुल, अपशिष्ट का जलाया जाना वायु प्रदूषण का प्रमुख कारण है। इस दौरान राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, कमलेश्वर प्रसाद कमल प्रमुख मौजूद रहे।