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नगरपालिका नहीं बुझा सकी रहवासियों की प्यास

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मिर्जापुर। कई अध्यक्ष बदले शहर की आबादी बढ़ती गई लेकिन नगरवासियों की प्यास बुझाने के लिए कोई मुकम्मल योजना को परवान नहीं चढाया गया। शहर के कई इलाके गर्मी के दिनों में बेपानी हो जाते हैं तो जिन इलाकों में पानी की कमी नही है वहां पानी इतना दूषित होता है कि इसे हलक के नीचे उतारने की हिम्मत नहीं होती है। यह हाल तब है जब जिला केंद्र सरकार की अमृत योजना से आच्छादित है।
नगर की पौने तीन लाख की आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी को नगरपालिका के अध्यक्ष और सदस्य पूरी तरह नहीं निभा सके हैं। शहर के इमामबाड़ा, नटवां, सिविल लाइंस, रामबाग, रमईपट्टी, पीलीकोठी आदि इलाकों में पेयजल के लिए गर्मियों में लोग परेशान होते हैं। पहली मंजिल पर बमुश्किल पानी उपलब्ध हो पाता है। दूसरी मंजिल पर पानी पहुंचने की बात बेमानी लगती है। गर्मियों में लोगों को वाटर पंप लगा कर पानी के लिए मेहनत करनी पड़ती है। नगर क्षेत्र की पाइप लाइन इतनी पुरानी हो चुकी है कि उनमें जगह-जगह छेद हो गया है। इससे नालियों से गुजरने के दौरान पाइपों में गंदा पानी प्रवेश कर जाता है जिससे घरों में गंदे पानी की आपूर्ति होती है। तरकापुर मोहल्ले में पशु वधशाला संचालित होती है। कटने वाले पशुओं का रक्त और अन्य बेकार सामग्रियों को नालियों में बहा दिया जाता है जिससे नालियों का पानी लाल हो जाता है। कई बार क्षतिग्रस्त पाइपों से होता हुआ यह संक्रमित जल घरों तक पहुंच जाता है। कई बार तरकापुर मोहल्ले के लोगों ने नगरपालिका प्रशासन के खिलाफ कलेक्ट्रेट में धरना प्रदर्शन किया लेकिन परिणाम ढाक के तीन पात वाला ही निकला। ऐसे में लोगों को परेशानी हो रही है। पिछले नगरपालिका चुुनाव के दौरान वर्ष 2012 में नगर की आबादी दो लाख 48 हजार थी जो पांच वर्ष में बढ़ कर दो लाख 75 हजार तक पहुंच चुकी है। बावजूद इसके नगर में न तो नई पाइप लाइन बिछाई गई और न ही नई टंकियों का निर्माण कराया गया। लगभग 15 वर्ष पूर्व नगर पालिका दफ्तर परिसर में ही विशालकाय टंकी का निर्माण कराया गया है लेकिन वह निष्प्रयोज्य बनी हुई है। लाखों रुपये की लागत से बनी यह टंकी अब केवल मुंह ही चिढ़ा रही है।
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फाइलों में कैद है अमृत योजना
मिर्जापुर। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी अमृत योजना के तहत चयनित जिलों में मिर्जापुर वासियों को शुद्ध पेयजल के लिए इस योजना के तहत शामिल किया गया है।130 करोड़ के प्रोजेक्ट वाली योजना फाइलों में सिमटी है।छह माह पूर्व 23 करोड़ पर रुपया योजना को शुरू करने लिए जलकल विभाग को भेज दिया गया है।जलकल विभाग ने मई 2017 में नगर पालिका को पैसा भेज दिया लेकिन छह माह बाद भी योजना का शुभारंभ नही हो सका है। वर्तमान में नगर क ो पेयजलापूर्ति 66 बड़े ट्यूवेल व 503 मिनी ट्यूवेल के अलावा 11 ओवरहेड टैंक से की जा रही है। इसमें से तीन जर्जर हालत में बंद पड़े हैं। योजना के तहत 60 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) का प्लांट लगाया जाएगा। ढाई वर्षों में प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य है जो 2019 में पूरा करना है, लेकिन छह माह पहले ही देर हो चुकी है। योजना के पूरा होने पर 24 घंटे प्रेशर के साथ शुद्ध पानी मिलेगा। जलकल के अभियंता सौरभ श्रीवास्तव ने बताया कि नगर के जान्हवी होटल के पीछे प्लांट लगाया जाएगा।योजना के तहत पुराने पाइपों को बदल कर नई पाइपें लगाई जाएंगी।
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