मिर्जापुर। जनपद में समस्त सरकारी चिकित्सालयों में लगातार बढ़ रही ठंड की चपेट में आकर करीब तीन लाख मरीज एक महीने अंदर जनपद के चिकित्सालयों में पहुंचे। इसमें लगभग दो हजार मरीजों की हालत गंभीर होने पर डाक्टरों ने इन्हें भर्ती कर लिया। इसमें सबसे अधिक कोल्ड व डायरिया एवं बुखार व सास के रोगी पाए गए। अधिकांश मरीज ठीक होकर चले गए लेकिन सौ मरीज ऐसे मिले जिनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। ऐसे में इन्हें बीएचयू रेफर करना पड़ा।
कड़ाके की ठंड के बीच बच्चे व बूढे़ इसकी चपेट में आने लगे हैं। महिलाएं भी ठंड से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकी हैं। पिछले एक दिसंबर से 31 दिसंबर के आंकड़ों पर गौर करें तो पाते हैं कि जनपद के जिला चिकित्सालय में ही केवल एक लाख मरीज इलाज कराने आए। इसके अलावा जनपद के सीएचसी व पीएचसी में इलाज को आने वाले मरीजों की संख्या दो लाख तक पहुंच गई। इसमें सबसे अधिक बच्चे रहे जो निमोनिया, बुखार, सर्दी जुकाम, कोल्ड, डायरिया आदि रोगों से ग्रसित रहे। दूसरे नंबर पर बुजुर्ग रहे। हालांकि कई रोगों में अल्ट्रासाउंड कराने भी जरूरत महसूस की गई लेकिन जिला अस्पताल समेेत अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर इसकी व्यवस्था ना होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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जनपद के सीएचसी पीएचसी पर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था ना होने से मरीजों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है। वह अपना इलाज तो सीएचसी पीएचसी में करा लेते हैं लेकिन जांच के लिए उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है। निजी पैथॉलाजी में जांच कराने पर हजारों रुपये खर्च करना पड़ता है।
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ठंड के मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ती है। उनके इलाज की सुविधा मौजूद है। जहां तक सीएचसी पर एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा के ना होने की बात है, तो इन पर केवल अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था ही नहीं है, एक्सरे की सुविधा सीएचसी पर होती है। कभी कभी दवाएं समाप्त हो जाती हैं लेकिन इस समय यह पर्याप्त मात्रा में है। - डॉ. ओपी तिवारी सीएमओ