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अधर्म छोड़ सत्य के रास्ते पर चलने से मिलती है सफलता: जगदीशानंद

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मड़िहान। भक्ति कुंज सेवा समिति के तत्वाधान में मड़िहान कस्बा स्थित देवरी रोड पर सातवें व अंतिम दिन शनिवार को सरस संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक संत स्वामी जगदीशानंद महाराज ने कहा श्रीकृष्ण के सुमिरन से सुदामा के घर की दरिद्रता दूर हो गया था। सकाम भाव से किया कर्म स्वर्ग दिलाता है मुक्ति नहीं। उन्होंने कहा निष्काम कर्म पाप को भगाता है।
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कथा वाचक ने कहा यह शरीर वह कुरुक्षेत्र है जहां प्रवृत्ति निवृत्ति का युद्ध होता है। इस शरीर के रथ को जो श्री कृष्ण के हाथों देता है उसी की विजय होती है। कृष्ण ने सुदामा को सारी संपदा दे दी, लेकिन सुख में जो कृष्ण को भूल जाता है उसका सुख स्वप्न जैसा ही हो जाता है। भगवान द्वारा दिया गया उद्धव को उपदेश को कथा के माध्यम से भक्तों के सामने बखूबी पेश किया। सुख व दुख तो मन की एक कल्पना है। मन की निद्रा जागृत हो जाए तभी मानव को मृत्युलोक से मुक्ति मिलेगी। अधर्म के रास्ते को छोड़कर सत्य का रास्ता अपनाने से सफलता मिलेगी। आचार्य मोहनलाल तिवारी, व्यास रामप्रसाद तिवारी, अध्यक्ष गोपाल सेठ, प्रबंधक राजेश सिंह, ओमप्रकाश सिंह, बिनु चौरसिया, व्यवस्थापक कन्हैयालाल सेठ, सूर्यप्रताप सिंह, रमेश मिश्रा, संगीतकार बालमुकुन्द द्विवेदी, अनिल भरद्वाज, संजय सिंह, अनिल सोनी आदि उपस्थित रहे।
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