कछवां। मझवां विकास खंड क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में लाखों रुपये की लागत से बने सचिवालय भवनों पर ग्रामीणों ने अवैध कब्जा कर रखा है। कब्जाधारी इन भवनों का उपयोग निजी कार्य के लिए कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के चलते ही गांवों में बने सचिवालय भवन शोपीस बने हुए हैं।
मझवां विकास खंड क्षेत्र के बरैनी, केवटाबीर, सेमरी, मीतई, चकीया, चड़िया गांवों में पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत वर्ष 2011-12 में लगभग 15 लाख रुपये की लागत से सचिवालय भवनों का निर्माण कराया गया था। इसके पीछे सरकार की यह मंशा थी कि एक ही छत के नीचे ग्राम विकास से संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी बैठकर जनता और गांव से जुड़ी विकास योजनाओें को संचालित करें। लेकिन इन भवनों में ग्राम प्रधानों और ग्राम विकास अधिकारियों के न बैठने से ये खाली पड़े रहते हैं। उधर, इन भवनों पर ग्रामीणों ने कब्जा जमा लिया है। कुछ सचिवालय बरैनी, केवटाबीर तो अभी भी अधूरे पड़े हैं और इनका अब तक निर्माण पूरा नहीं हो सका है। वहीं, पहाड़ी विकास खंड के जौसरा गांव में सचिवालय में ग्रामीणों ने पूरी गृहस्थी ही बसा ली है। सेमरी, बरैनी, केवटाबीर, मितई गांवों में लोग इस भवन परिसर में धान गेहूं की कटाई-मड़ाई का काम करते हैं।
मझवां एवं पहाड़ी विकास खंड में कहीं भी पंचायत भवन पर कब्जा नहीं है। यदि कहीं कब्जे हैं तो उसे हटवाया जाएगा।
- सीआर जायसवाल, डीपीआरओ।