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पंच परमेश्वर महादेव मंदिर पर मनाई जन्माष्टमी

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द्वारकाधीश मंदिर में राधा-कृष्ण का किया गया शृंगार
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मिर्जापुर। जिले भर में रविवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आस्था और उल्लास के साथ मनाई गई। मध्य रात भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की... गूंजने लगा। महिलाओं और पुरुषों ने सोहर गाकर खुशियां मनाईं। प्रसाद के रूप में धनिया की पंजीरी बांटी गई। खुशी में आतिशबाजी की गई जिससे आसमान रोशन हो उठा। नगर में जगह-जगह भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए। श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों की झांकियां सजाई गई थी। शाम से देर रात तक श्रद्धालु झांकियों के दर्शन करते रहे।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जिला कारागार सजाया गया था। श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही पूजा के साथ खुशियां मनाई गईं। शाम से देर रात तक लोग प्रभु श्रीकृष्ण की झांकियों के दर्शन करते रहे। मुख्य अतिथि जेल अधीक्षक अनिल राय रहे। प्रसाद का वितरण किया गया। इस दौरान जेलर सुरेश मिश्रा, डिप्टी जेलर आनंद जायसवाल एवं जय नारायण सिंह मौजूद रहे। जनपद के समस्त थानों में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेने के बाद सोहर व भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा। पुलिस लाइंस परिसर में आधी रात को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही आतिशबाजी की गई जिससे आसमान रोशन हो उठा। वहीं घंटा-घड़ियाल एवं जयकारे से पूरा परिसर गूंज उठा। पुलिस लाइन में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायकों ने भजन प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि डीआईजी पीयूष श्रीवास्तव रहे विशिष्ट अतिथि एसपी शालिनी रहीं। श्रद्धालुओं ने भव्य झांकियों के दर्शन किए। इस मौके पर जिलाधिकारी अनुराग पटेल, एडीएम राजित राम प्रजापति, एसडीएम सविता यादव, एएसपी प्रकाश स्वरूप पांडेय, अजय सिंह, सीओ नगर संजय सिंह, सीओ सदर बृजेश त्रिपाठी उपस्थित रहे। 39 वीं वाहिनी पीएसी के तत्वावधान में पीएसी परिसर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। इस मौके पर गायकों ने भजन प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि सेना नायक अवधेश कुमार पांडेय रहे।
उधर नगरीय इलाकों सहित विंध्याचल व जिले के ग्राम्यांचलों के विभिन्न मंदिरों व घरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। मध्य रात्रि समय खीरा के अंदर से भगवान श्रीकृष्ण के जन्म लेते ही महिलाओं ने सोहर व मधुर भजनों को प्रभु के चरणों में समर्पित किया। जगह-जगह श्रीकृष्ण की लीलाओं से संबंधित सजाई गई मनोहारी झांकियों को देखने के लिए नर-नारियों एवं बच्चों का तांता लगा रहा। प्रभु श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उपरांत सभी को प्रसाद का भी वितरण किया गया।
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भटवा पोखरी स्थित पंच परमेश्वर महादेव मंदिर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाई गई। मोहल्लेवासियों ने श्रीकृष्ण व राधा और बाबा अमर नाथ की झांकी सजाई। इस मौके पर कंचन पांडेय, पम्मू वर्मा, शुभम वर्मा, अंशु अग्रहरी, अमन शर्मा, समीक्षा पांडेय, निश्चय पांडेय, चिंटू सिंह, रामसहाय सिंह आदि उपस्थित रहे।
ओ बांके बिहारी तेरे कारे-कारे नैन, नजर न लग जाए...
मिर्जापुर। नगर के बुंदेलखंडी स्थित श्री द्वारकाधीश जी महाराज मंदिर में शनिवार की शाम श्री ठाकुर जी महाराज के स्थापना की 118 वीं वर्षगांठ मनाई गई। सुबह विशेष पूजन किया गया। भजन संध्या में गायकों ने भजन सुनाए। वहीं श्री द्वारकाधीश और द्वारकेश्वर महादेव का शृंगार किया गया। मुख्य यजमान तथा मंदिर के ट्रस्टी प्रदीप कुमार बजाज ने परिवार के सदस्यों के साथ पूजन किया। भजन संध्या में खलीलाबाद से आए गायक हरमिंदर सिंह रोमी ने भजन सुनाया। उन्होंने ये सारे खेल तुम्हारे हैं..तथा मैं तुमसे दौलत क्या मांगूू..सुना कर भक्तों को खूब झूमाया। उन्होंने- हैं भाव के भूखे भगवन, जब भक्त पुकारे प्रेम से प्रभु दौड़े चले आते हैं...तथा ओ बांके बिहारी तेरे कारे-कारे मोटे नैन, कहीं नजर ना लग जाए.. प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। श्री ठाकुर जी की विशेष उत्सव आरती के उपरांत भक्तों के बीच प्रसाद का भी वितरण किया गया। मंदिर के व्यवस्थापक परितोष बजाज ने मंदिर की सभी व्यवस्थाएं खुद संभाल रखी थी। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
विंध्याचल। जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां विंध्यवासिनी और अष्टभुजी देवी के दर्शन किए। मां का फूलों से शृंगार किया गया था। भोर से पूरे दिन दर्शन पूजन का दौर चलता रहा।
बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां विंध्याचल देवी के दर्शन किए। महिलाओं ने हलवा-पूड़ी का भोग लगाया और पुरुषों ने नारियल-चुनरी व माला-फूल, प्रसाद चढ़ाकर मंगलकामना की। मंदिर को सजाया गया था। मां के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने मां सरस्वती, मां काली, मां लक्ष्मी, मां दुर्गा, मां शीतला, गणेश भगवान, दक्षिणमुखी हनुमान, श्री पंचमुखी महादेव एवं बटुक भैरव सहित कई अन्य मंदिरों में दर्शन पूजन किया। भक्तों ने मंदिर के गुंबद व हवन कुंड का परिक्रमा कर पुण्य कमाया। मंदिर परिसर में शहनाई की धुन पर जहां मुंडन संस्कार का क्रम चलता रहा, वहीं वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जनेऊ संस्कार भी होते रहे।
मां विंध्यवासिनी देवी के दर्शन करने के बाद मां अष्टभुजी के दरबार में पहुंचे भक्तों ने बड़े ही भक्ति भाव से दर्शन कर मंगलकामना की। जन्माष्टमी पर्व होने के चलते मंदिर की तरह-तरह के फूल-पत्तियों, चुनरी व रंगीन लाइटों से की गई सजावट की छटा देखते ही बन रही थी। मां की भव्य आरती के समय कपाट बंद होने पर कतार में खड़े भक्त उसी स्थान पर बैठकर कपाट के खुलने का इंतजार करते नजर आए। मां का कपाट खुलने के उपरांत मंदिर में पुन: दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया था। जमीन से पहाड़ पर स्थित मां के मंदिर तक बनी सीढ़ियों पर कतार में खड़े श्रद्घालु माता का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े चले जा रहे थे। मां का दर्शन-पूजन करने के उपरांत बड़ी संख्या में भक्तों ने कालीखोह स्थित मां काली के धाम में जाकर शीश झुकाया। बड़ी संख्या में श्रद्घालुओं ने पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य के भागी बने। पहाड़ पर ही भैरव कुंड और सीताकुंड पर भी श्रद्घालुओं ने पहुंचकर दर्शन पूजन कर सुख-समृद्घि की कामना की।
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