मिर्जापुर। नगर पालिका क्षेत्र में स्थित 341 कुओं में से 67 पर कब्जा हो गया है। वहीं, 50 कुएं सूख चुके हैं। इससे जल संरक्षण के प्रयास को धक्का लगा है। नगर के लोगों का कहना है कि प्रशासन जलाशयों का संरक्षण ही नहीं कर पा रहा, तो जल संरक्षण कैसे होगा। यदि कुओं का प्रयोग होता तो नगर क्षेत्र में भूगर्भ जलस्तर कम न होता।
भूगर्भ जल विभाग के अनुसार नगर क्षेत्र सेमी क्रिटिकल जोन में आता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि नगर क्षेत्र में पानी का संकट है। नगर पालिका के रिकार्ड के अनुसार नगर क्षेत्र में 341 कुएं हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इनमें से कई अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं अथवा कई कुएं सूख चुके हैं और निष्प्रयोज्य हो चुके हैं।
इन निष्प्रयोज्य कुओं पर भी अब भूमाफियाओं की नजर हैं। उदाहरण के तौर पर नगर के वासलीगंज में घास की गली के दोनों मोड़ पर दो कुएं थे। उनमें से एक अभी भी है और निष्प्रयोज्य हो चुका है जबकि दूसरे का पता नहीं है। नागरिकों के अनुसार वासलीगंज, लालडिग्गी, इमरती रोड, गणेशगंज, बल्ली का अड्डा सहित हर मोहल्ले में कुएं बने हुए थे लेकिन अब इनमें से कुछ ही दिखाई देते हैं।
केवल वासलीगंज में ही लगभग 20 कुएं थे जिनमें से काफी का पता नहीं है। इन कुओं की वजह से भूगर्भ जलस्तर बरकरार रहता था और नागरिकों को भी शुद्ध शीतल जल मिलता था। लेकिन अब कुओं का अस्तित्व ही संकट में है।