मिर्जापुर। पीएम नरेंद्र मोदी 16 फरवरी को वाराणसी में अपने कार्यक्रम के दौरान जिले के चयनित 65 कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक प्रदान करेंगे। इससे उन कुम्हारों की बर्तन बनाने की क्षमता दोगुनी हो जाएगी। इस कार्यक्रम को प्रधानमंत्री के किसानों व अन्य की आय को दोगुना करने वाले कार्यक्रम से जोड़ कर देखा जा रहा है।
आमतौर पर कुम्हार परंपरागत रूप से बनाए गए चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते हैं। इनमें पुरवा, कसोरा, सुराही व घड़ा आदि शामिल है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर कुम्हार अन्य काम भी इसी चाक पर करते हैं। परंपरागत चाक में शारीरिक मेहनत भी शामिल होती है। बार- बार लकड़ी के डंडे से चाक को चलाना पड़ता है। तेज गति के लिए उसे लगातार चलाना पड़ता है। इससे कुम्हारों की अधिकतर शक्ति व श्रम इस चाक को चलाने में ही समाप्त हो जाती है। इस शक्ति को बचाने व तीव्र गति से काम करने के लिए इलेक्ट्रिक चाक की व्यवस्था की गई है। इस चाक को चलाने में बिजली की शक्ति का प्रयोग किया जाता है जो कम पैसों में ही अधिक काम कर देता है। साथ ही कुम्हार अपने काम को इत्मीनान से कर सकता है। इस चाक से कई डिजाइनें भी मिट्टी के बर्तनों पर बनाई जा सकती हैं। कुम्हारों की परंपरागत आजीविका को बचाए रखने के लिए इस चाक का अब बहुतायत से प्रयोग किया जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर कुम्हारों में जबरदस्त उत्साह है।
जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी जवाहर लाल ने कहा कि आनलाइन आवेदन के माध्यम से ऐसे कुम्हारों का चयन किया गया है जो इस पेशे में अभी भी काम कर रहे हैं। उनको पीएम अपने हाथों से इलेक्ट्रिक चाक प्रदान करेंगे।