मिर्जापुर। वासंतिक नवरात्र की अष्टमी व नवमी तिथि पर रविवार को पांच लाख से अधिक भक्तों ने मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए। मां के महागौरी और सिद्धि दात्री के स्वरूप का का दर्शन पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं ने त्रिकोण परिक्रमा कर मां काली और अष्टभुजा का दर्शन पूजन किया। नौ दिन व्रत धारण करने वाले भक्तों ने हवन कुंड में आहुति डाल कर व्रत अनुष्ठान पूरा किया। गंगा घाटों पर भीड़ के चलते श्रद्धालुओं को स्नान के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ी। भीड़ को नियंत्रित करने में सिपाहियों को परेशानी हुई।
नवरात्र के आखिरी दिन भोर से ही धाम की सभी गलियां भक्तों से पटी रहीं। गलियों में तिल रखने तक की जगह नहीं बची थी। श्रद्धालु हाथों में नारियल लेकर दोनों हाथों को ऊपर उठाए कतार में खड़े थे। नई वीआईपी व पुरानी वीआईपी पर पांच सौ मीटर तक लाइन लगी रही। मंगला आरती के बाद से दर्शन पूजन का सिलसिला देर रात्रि तक चलता रहा। मां विंध्यवासिनी के दर्शन के बाद भक्तों ने त्रिकोण परिक्रमा की। काली खोह स्थित मां काली, अष्टभुजा पहाड़ पर विराजमान मां अष्टभुजा व राम गया घाट स्थित मां तारा देवी के दर्शन कर सुख शांति की कामना की। अष्टभुजा मंदिर में दर्शन पूजन करने के लिए भक्तों की लंबी लाइन लगी रही। श्रद्घालुओं ने अष्टभुजा पहाड़, मोतिया तालाब व भैरव कुंड के पास बाटी चोखा बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। अष्टभुजा पहाड़ी पर सारी रात भक्तों का आवागमन जारी रहा। चुनार संवाददाता के अनुसार स्थित मां दुर्गा का दर्शन करने के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। नवरात्र के अंतिम दिन सैकड़ों भक्त माता के दरबार में मत्था टेक आशीर्वाद मंगा। अहरौरा संवाददाता के अनुसार पहाड़ पर विराजमान भंडारी देवी के दर्शन को सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। भक्त मां भंडारी देवी के दर्शन पूजन कर निहाल हो गए। विंध्याचल में खोया पाया केंद्र से बिछुड़े लोगों की सूचना प्रसारित कर उन्हें घर वालों से मिलाया गया।
देश के कोने कोने से आए माता के भक्त नौ दिनों तक विन्ध्यधाम में कलश स्थापना करने वाले भक्त रविवार को पूर्णाहुति कर अपने अपने घरों को रवाना हुए। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में प्लेटफार्म एक व दो पर यात्रियों की भीड़ उमड़ी रही।जब कोई ट्रेन प्लेटफार्म पर पहुंचती थी तो उसमें चढ़ने के लिए मारामारी शुरू हो जाती थी।
नवरात्र में विन्ध्यधाम में भक्तों की भीड़ अधिक रहता है। इसमें होटलों में कमरे नहीं मिल पाते हैं। दूर दराज से आए माता के भक्त नवरात्र आरंभ होने के पूर्व ही अपने मनचाहे होटलों में कमरों की बुकिंग करा लेते हैं। नवरात्र के अंतिम दिन धाम के सभी होटलों से भक्तों का कमरों को छोड़ने का क्रम जारी रहा।