क्षेत्र के किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिल पाया है। किसानों ने बैंको तथा समितियों से कर्ज लेकर रबी, धान, उर्द, तिल, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि फसलों की बुवाई की थी। बैंकों व समितियों द्वारा किसानों को ऋण देने के दौरान बीमा राशि काट ली गई थी। फसलों की बीमा कराने वाले किसानों को फसल सूखने के बावजूद बीमा लाभ नही दिया गया। दो वर्षों से किसानों की बीमा राशि न मिलने से आक्रोश व्याप्त है।
हलिया विकास खंड के 212 गांवों में अहुगी कला, भटवारी दिघिया, सिकटा महुगढ़, गलरा खुटहा, हर्रा, उमरिया, बरौंधा आदि में 10 समितियां तथा इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, जिला सहकारी बैंक, इलाहाबाद बैंक समेत लगभग आधा दर्जन शाखाएं हलिया, ड्रमंडगंज, पवारी कला, बरौंधा में स्थित हैं। इसमें हजारों की संख्या में किसान बैंकों से किसान क्रेडिट कार्ड, समितियों से खाद बीज एवं नगद लेकर खेती किसानी करते हैं। किसानों से शासनादेश के तहत प्रति गाटा हेक्टेयर के हिसाब से ऋण देने के दौरान बैंक एवं समितियां बीमा राशि काट लेते हैं। इसके बावूजद किसानों को दो वर्ष से बीमे की कोई धनराशि नहीं दी गई है, जिससे किसानों में आक्रोश व्याप्त है। हलिया विकास खंड में तीन वर्ष से अकाल के कारण किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि बैंकों द्वारा बीमा राशि तो काट ली जाती है, लेकिन न बीमा कंपनी का नाम बताया जाता और न कोई रसीद दी जाती है। बीमा का लाभ केवल बबुरा कला समिति को ही मिला है, शेष नौ समितियों को बीमा राशि नही मिल पाई है। क्षेत्रीय किसान जगदीश सिंह, राधेश्याम दूबे, उदय प्रताप सिंह, सुरेश दूबे, नरेश दूबे, संतोष कुमार, माधो लाल, हकीम अली, उमर अली ने बैंकों व समितियों के कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताया है। इस संबंध में शाखा प्रबंधक इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक हलिया के कमलाकांत मालवीय ने बताया कि किसानों के खातों में रबी फसल का बीमा राशि आ चुकी है। लेकिन इस मामले में अन्य बैंकों के शाखा प्रबंधक कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। लाखों की संख्या में किसान बैंक और समितियों को बीमे की मोटी राशि अदा कर चुके हैं। किसानो ने आरोप लगाया कि बैंक के शाखा प्रबंधकों द्वारा किसानों को ठगा जा रहा है।