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सोमवार को 70.550 मीटर पहुंचा गंगा का जलस्तर

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मिर्जापुर। गंगा के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से घटाव होना राहत की बात है लेकिन प्रशासन के साथ ग्रामीण सतर्कता बरत रहे हैं। पिछले तीन दिनों से तेज बारिश नहीं होने के कारण गंगा का जलस्तर घट रहा है। ऐसे में कटाव की आशंका पैदा हो गई है। सोमवार को गंगा का जलस्तर 70.550 मीटर दर्ज किया गया। अगर तेज बारिश होने लगी तो फिर जलस्तर में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका का भय बना हुआ है। जनपद के छानबे, विंध्याचल, कोन, पड़री, मझवां, सीखड़ एवं नरायनपुर के तटवर्तीय इलाके के लोग बाढ़ की आशंका को लेकर चिंतित हैं।
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पिछले दिनों गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की सीढ़ियां बढ़ गई हैं। जहां गंगा में समाहित होने लगी हैं, वहीं कटान होने से गंगा किनारे के पुराने मकान व मंदिरों पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। करीब 20 दिनों पूर्व गंगा में फैली लंबी व मोटी रेत की चादर भी गायब हो चुकी है। गंगा की धार धीरे-धीरे तटवर्तीय इलाकों को स्पर्श करने लगी है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि अभी गंगा घरों से काफी दूर पर हैं। पिछले कुछ दिनों में अचानक गंगा के बढ़ाव को देखकर लग रहा था कि जल्द ही पानी गांवों तक पहुंच जाएगी, लेकिन वर्तमान समय गंगा के पानी में ठहराव होने से तटवर्ती इलाकों के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। सावन माह में गंगा घाटों पर गंगा जल लेने के लिए पहुंचने वाली कांवरियों की टोली की सुरक्षा के मद्देजनर जिला प्रशासन की तरफ से विशेष इंतजाम किए गए हैं, जिससे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। गंगा के जलस्तर में बढ़ोत्तरी को देखते हुए घाटों पर स्नान करने के लिए प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग आदि लगवाए गए हैं। गंगा के बढ़ाव को देखने के लिए नगर सहित विंध्याचल के गंगा घाटों पर लोग पहुंचे रहे, वहीं गंगा में नावों के संचालन पर प्रतिबंध लगने के कारण गंगा पार से शहर में आने वाले लोगों को शास्त्री सेतु का चक्कर काटकर आना पड़ रहा है। गंगा के जलस्तर को देखते हुए जहां जिला प्रशासन बाढ़ से निपटने की तैयारी को पूरा करने का दावा कर रहा है, वहीं तटवर्ती इलाके के ग्रामीण भी सक्रिय हो गए हैं।
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