मिर्जापुर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान के जैव उर्वरक पर शोध कर रहे छात्रों ने नरायनपुर के बेला गांव में भ्रमण किया। यहां आयोजित किसान संगोष्ठी में परियोजना संचालक डा. जेपी वर्मा ने किसानों को जैविक खाद का महत्व बताया। इस दौरान ग्रामीणों को जैविक खेती अपनाने, जैविक खाद के उपयोग आदि के लिए जागरूक किया।
कृषि वैज्ञानिक ने कहाकि जैविक खाद सब्जी और अन्य फसलों की उत्पादन क्षमता को बढ़ाता है। किसानों से कहाकि समय समय पर खेतों की मिट्टी की जांज अवश्य करा ले। डा. जेपी वर्मा की शोध टीम में आनंद कुमार गौरव, गोवर्धन कुमार चौहान, दुर्गेश कुमार जायसवाल, अजीत सिंह ने किसानों को जैविक उर्वरक बनाने के बारे में बताया। कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया में सर्वप्रथम मिट्टी के नमूने लेकर प्रयोगशाला मेें पौधों के विकास और मृदा उर्वरक बढ़ाने वाले सूक्ष्म जीवों को निकालते है। इन्ही सूक्ष्म जीवों को मिलाकर लैब में जैव उर्वरक तैयार किया जाता है। संगोष्ठी के दौरान किसानों को जैविक खाद का वितरण किया गया। बताया कि बहुत आसानी से पांच से 10 रूपया में एक किलोग्राम जैविक खाद बनाया जा सकता है।