योगी सरकार में विभागीय अधिकारी इतनी तेजी से काम करने लगे हैं कि उन्हें यह तक पता नहीं है कि कौन जिंदा है और कौन मर गया है। उनकी इस लापरवाही के चलते एक जिंदा व्यक्ति को शासन से मिल रहे वृद्घा पेंशन पाने के लिए अपने जिंदा साबित करने के लिए विभागों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। फिर भी अभी तक अधिकारी यह तय नहीं कर पाए हैं कि वह जिंदा है कि मर गया है। मामला विकास खंड कोन के सारी पट्टी गांव का है।
सारी पट्टी गांव निवासी बुद्घू पुत्र अब्दुल गफूर वृद्घा पेंशन योजना के तहत पेंशन मिल रहा था। लेकिन पिछले कुछ माह से उसे पेंशन नहीं मिल रहा है। कई महीने से पेंशन नहीं मिलने पर जब वह विभाग में इसका कारण पता करने गया तो उसे बताया गया कि इस नाम के व्यक्ति की मौत हो चुकी है। इसलिए उसका पेंशन बंद कर दिया गया है। खुद को मृत होने की बात सुन वुद्घू हैरान हो गया। उसने लिपिक से पूछा कि उसकी मौत कब और कैसे हुई। यह उसे भी नहीं पता है। फिलहाल वह उसके सामने जिंदा खड़ा है। लाभार्थी को जिंदा देख लिपिक भी हैरान हो गया। पूछने पर बताया कि वित्तिय 2017-18 के सत्यापन के दौरान उसके गांव के ग्राम पंचायत अधिकारी समेत अन्य अधिकारियों ने सूची में उसको मृत दिखा दिया है। जिससे उसको पेंशन मिलना बंद हो गया है। अगर वह अपने जिंदा होने का प्रमाण अधिकारियों को दे दे तो उसे पेंशन मिलने लगी। पीड़ित ने जिलाधिकारी को पत्रक देकर पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्घ कार्रवाई करने की मांग की है।
इनसेट
मामले की जानकारी है। ऐसा कोई मामला है तो इसकी जांच समाज कल्याण अधिकारी से कराई जाएगी। दोषी मिलने पर अधिकारियों के विरुद्घ कार्रवाई होगी।
देवेंद्र प्रताप सिंह
प्रभारी जिलाधिकारी