मिर्जापुर। नगर के सिटी क्लब में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक चिन्मयानंद बापू ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का श्रवण कराया। कहा कि भक्ति की कोई उम्र नहीं होती। सत्संग के माध्यम से भगवान को प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान हर जगह हैं लेकिन उन्हें देखने के लिए भगवत कथा का रसपान करना होगा। परमात्मा को प्रसन्न करने के लिए मन में कथा सुनने के लिए भाव लाना होगा। अंत में सृष्टि के उत्पत्ति की कथा सुनाई। इस दौरान परिसर कथा सुनने वालों से भरा रहा।
स्वामी चिन्मयानंद ने कथा में बताया कि प्रभु की भक्ति करने के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती। बापू ने उदाहरण देते हुए कहा कि ध्रुव जी ने छह वर्ष की उम्र मे ही भगवान का दर्शन किया था। उन्होंने कहा कि बाल्यावस्था से ही माता पिता को प्रभु की भक्ति से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। जीवन में विवेक व भगवान की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल साधन सत्संग है। सतसंग से ही हमारा जीवन संस्कारों से परिपूर्ण होता है। बापू ने कथा के दौरान कहा कि नारद जी ने जब सनकादिक ऋषियों से हरिद्वार के आनंद नाम के तट पर भागवत कथा का रसपान किया तो, भक्ति मैया स्वयं अपने दोनो पुत्रों ज्ञान व वैराग्य के साथ प्रकट होकर वृंदावन से हरिद्वार आकर नृत्य करने लगीं। उसके बाद भगवान ने खुद प्रकट होकर नारद व सनकादिक ऋषियों को दर्शन दिया था। यह भागवत था का सामर्थ्य है। आगे कहा कि भगवान हर स्थान पर मौजूद है, भगवान को देखने के लिए जिस दृष्टि की जरूर होती है, उसके लिए श्रद्घा भाव के साथ भागवत कथा का रसपान करना होगा। कथा के अंत में चिन्मयानंद बापू ने सृष्टि के उत्पत्ति की कथा सुनाई। इस दौरान श्रोतागण भागवत कथा में लीन रहे।