शेरवां। धोबही गांव में स्थित मां दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दूर-दूर से भक्त यहां मन्नत मांगने आते हैं। मान्यता है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी हो जाती है। पूरे नवरात्र में गांव का कोई भी व्यक्ति मांस मदिरा को हाथ तक नहीं लगाता। नशा करके आने वाले का ग्रामीण बहिष्कार करते हैं।
मां भगवती की भक्ति में लीन ग्रामीण पूरे नवरात्र भर मांस-मदिरा का सेवन बंद कर देते हैं। ग्रामीणों के अनुसार वर्षों पहले में धोबही के लोग आग की घटनाओं से परेशान होकर एक तांत्रिक के पास गए थे। तांत्रिक ने बुरी आत्मा का साया बताकर मां दुर्गा का मंदिर बनवाने का सुझाव दिया था। गांव वालों ने मां दुर्गा के मंदिर का निर्माण कराया। तांत्रिक ने गांव वालों से वचन लिया कि गांव के लोग नवरात्र भर मांस, मदिरा आदि व्यसनों से दूर रहेंगे। इसके बाद आग लगने की घटनाएं बंद हो गईं। तभी से हर वर्ष शारदीय व वासंतिक नवरात्र में मंदिर में विशेष पूजन होता है। लोग खुद मांस-मदिरा से दूर रहते हैं। यदि इनका सेवन करके कोई चला आए तो गांव वाले उसका बहिष्कार कर देते हैं। उसे गंगा स्नान कराकर प्रायश्चित करना होता है। उसके बाद मां भगवती के चरणों में माथा टेकने के बाद ही गांव में प्रवेश मिलता है। मंदिर का निर्माण रामस्वरूप सिंह बिंद की देखरेख में हुआ था और उनके परिवार वाले ही इसकी देखभाल करते हैं।