मिर्जापुर। गांवों और शहरों में भूमाफिया बेखौफ तालाबों, पोखरों और कुओं को पाट रहे हैं। उच्च न्यायालय ने तालाबों के संरक्षण का आदेश दिया है लेकिन प्रशासन की सुस्ती की चलते उनको पाट कर अवैध कालोनियां बनाई जा रही हैं। शहर में कई मुहल्ले तालाबों के नाम पर आबाद हो गए हैं।
शहर के भरुहना और स्टेशन रोड पर सात तालाब हैं। उनको पाट कर धीरे-धीरे मकान बनाए जा रहे हैं। कजरहवा पोखरा, पक्का पोखरा, विसुंदरपुर, पुरानी दशमी तालाबों के नाम पर हैं लेकिन अब इन नामों पर मुहल्ले आबाद हैं। तालाबों का पता तक नहीं। भटवा की पोखरी का भी हाल कुछ ऐसा ही है। कछवां संवाददाता के अनुसार सात तालाब हैं जिसमे अब मात्र एक तालाब का अस्तित्व बचा हुआ है। बरैनी में नौ तालाब हैं जिसमे से मात्र तीन तालाब बचे हुए हैं। शेष पर अतिक्रमण कर बिल्डिंगे बना दी गई हैं। इस मामले में लेखपालों ने दो सौ लोगों को जमीन की नापी कर उन्हें तालाब की भूमि पर बने मकान को हटाने का नोटिस जारी किया है। कुछ लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया है। शेरवां संवाददाता के अनुसार क्षेत्र के दर्जन भर गांवों के तालाबों पर अतिक्रमण बेखौफ होकर धड़ल्ले से जारी है। अस्सी के दशक में टेस्टवर्क योजनाअंतर्रगत सेमरां गांव में दो वीघा पांच विस्वा में आदर्श तालाब की खुदाई की गई है। जो अब अतिक्रमणकारियों के चलते अपनी दुर्दशा पर खुद आंसू बहा रहा है। तालाब पर हो रहे अतिक्रमण घास-फूस, जलकुंभी जमने से तालाब अपने अस्तित्व को खोता जा रहा है। समय-समय पर तालाब की खुदाई व सफाई का कार्य ग्राम पंचायत कोटे से किया जाता है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते तालाब पर अतिक्रमण व गंदगी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले बुलंद हैं। क्षेत्र के सेमरां गांव में स्थित तालाब की खुदाई एक वर्ष पूर्व मनरेगा से लाखों रुपये खर्च करके की गई थी। खुदाई के बाद तालाब के किनारे बसे लोगज चारों ओर से अतिक्रमण करके तालाब के अस्तित्व को मिटा रहे हैं। बताते चलें कि यह हाल जमालपुर ब्लॉक मुख्यालय से सटे मात्र पांच सौ मीटर की दूरी पर स्थित सेमरां गांव के तालाब का है। राजस्व विभाग के अभिलेख में सेमरां गांव का तालाब कागज पर दो बीघा पांच बिस्वा में है, लेकिन अतिक्रमणकारियों के चलते मात्र पांच बिस्वा में सिमट कर रह गया है। जबकि शासनादेश है कि तालाबों पर हो रहे अतिक्रमण को हटाया जाय। साथ ही प्रत्येक सप्ताह इसकी समीक्षा की जाय, लेकिन इसके विपरीत क्षेत्र के सेमरां, जमालपुरमिल्की, सिकरा, घरवाह, सिकन्दरपुर, हसौली, शेरवां, गौरी, गुलौरी, ढेबरां, डोहरी, भडेवल, ओडी, सहेवा, सरसा, पसही, समेत दर्जनों गांवों के तालाबों के भीटों पर अतिक्रमण के कारण सार्वजनिक तालाबों का अस्तित्व मिटता जा रहा है। जिगना संवाददाता के अनुसार छानबे विकास खंड के विजयपुर, भटेवरा, बघेड़ाकला, नदिनी, खैरा राजमन, बघौरा, कसघना, नरोइयां, गौरा, कोलेपुर आदि गांवों में तालाबों भीटों पर अतिक्रमण किया गया है। तहसील के कर्मचारी अतिक्रमण हटाने के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहे हैँ।
तालाब पर अतिक्रमण की खबर में इनसेट
ब्लॉक, तहसील एवं थाना स्तर पर तालाबों पर अतिक्रमण को रोकने और नोटिस जारी करने के लिए टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें अपने क्षेत्रों में सक्रियता से कार्य कर रही हैं।-प्रियंका निरंजन, प्रभारी जिलाधिकारी