मिर्जापुर। कोरोना महामारी के चलते जेल में बंदियों के बढ़ रहे दबाव के चलते जनपद न्यायाधीश लालचंद्र गुप्ता ने वर्चुअल अदालत के माध्यम से 17 प्रार्थना पत्रों की सुनवाई करते हुए छह प्रार्थना पत्रों में आरोपितों को रिहा किया। इसके अलावा अदालतों में 13 बंदियों को सुनवाई कर रिहा किया गया। जिला जेल में लघु आपराधिक मामलों में निरूद्ध बंदियों को 60 दिन के लिए रिहा करने के लिए जेल अधीक्षक ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। जिनको विशेष अदालत लगाकर रिहा किया जा रहा है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकारण के प्रभारी सचिव सिविल जज मनोज कुमार ने बताया कि जेल में वर्तमान में 688 बंदी निरुद्ध है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट की कमेटी ने सात साल से कम सजा वाले विचाराधीन बंदियों को रिहा करने का आदेश पारित किया है। जिला कारागार द्वारा बंदियों की सूची बनाई गई है। जनपद न्यायाधीश लालचंद्र गुप्ता के निर्देशन में न्यायालय का गठन किया गया। शुक्रवार को जिलाजज ने वर्चुवल माध्यम से सुनवाई कर 17 बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया। गठित न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आनंद कुमार उपाध्याय द्वितीय के सामने 33 प्राथना पत्र प्रस्तुत किया गया। इसमें 17 बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया गया। अपर सिविल जज भावना भारती ने सुनवाई के दौरान सात बंदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया।