नरौरा बैराज से रोका गया नहर का पानी
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मंडलायुक्त रंजन कुमार की अगुवाई में बरसात के पानी को धरती के गर्भ में ले जाने की कवायद शुरू की जा रही है। इसके लिए मिर्जापुर में 129 तथा सोनभद्र में 107 स्थानों को चिह्नित कर वाटर शेड बनाया जा रहा है। तेज बहाव वाले स्थानों पर पत्थर, छोटे चेकडैम आदि के द्वारा पानी को नदियों की ओर जाने से रोक कर धरती के गर्भ में ले जाया जाएगा।
मिर्जापुर और पूर्व में इसी का भाग रहे सोनभद्र की पठारी भूमि असमतल होने के कारण यहां बारिश के पानी का ठहराव नहीं हो पाता। इन क्षेत्रों में तेज बहाव के साथ पानी भूमि के पोषक तत्वों को लेकर नदियों में चला जाता है। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति घटती जा रही है। बारिश के पानी के नदियों में जाने से पहाड़ी नदियों में बरसात के दिनों में उफान आने से जन-धन की हानि भी होती है। इसको देखते हुए विन्ध्याचल मंडल के मंडलायुक्त रंजन कुमार ने बरसात के पानी को धरती के गर्भ में समाहित करने के लिए वाटर शेड बनाने की योजना बनाई है।
इसके लिए कार्य शुरू कर दिया गया है। मंडलायुक्त ने बताया कि मिर्जापुर में 129 स्थान तथा सोनभद्र में 107 स्थानों को चिह्नित कर वाटर शेड बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। गांव में जल संरक्षण समितियों का गठन किया जाएगा। भूमि संरक्षण अधिकारियों को स्थान चिह्नित करने के लिए सेटेलाइट चित्र हासिल करने का निर्देश दिया गया है। इस चित्र के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जाएगी कि वह कौन से स्थान हैं जहां से सबसे तेजी से पानी नीचे की ओर भागता है।
उन्होंने बताया कि जल संरक्षण समितियों में शामिल लोगों को प्रशिक्षित अफसर गांवों में जा कर मेड़बंदी करने, छोटे चेकडैम बनाने, बिना सीमेंट गारे के पत्थरों को जोड़ कर पानी के बहाव रोकने की तकनीकी से परिचित कराएंगे। पत्थरों को तारों के जाल से बांध कर उन्हें तेज बहाव वाले स्थानों पर रखने की तकनीकी को भी आजमाया जाएगा। 30 डिग्री से अधिक स्लोप वाले स्थानों पर गड्ढे बना कर पानी को वहीं रोकने की कोशिश होगी।