चील्ह। विकास खंड कोन के कोल्हुआ गांव स्थित गंगा तट पर मंगलवार को अचला सप्तमी पर कुंभ जैसा नजारा व्याप्त रहा। इस अवसर पर उत्तर पश्चिम वाहिनी गंगा तट पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान-ध्यान कर आयोजित मेले का आनंद उठाया। यह मेला प्राचीन काल से ही कोल्हुआ गांव के गंगा तट पर लगता चला आ रहा है। मेले में मिर्जापुर जनपद सहित भदोही, सोनभद्र ,जौनपुर, वाराणसी से लोग स्नान करने के लिए आते हैं।
ऐसी मान्यता है कि जो दर्शनार्थी प्रयागराज कुंभ में स्नान नहीं कर पाते हैं। वह अचला सप्तमी के पावन अवसर पर यहां गंगा के उत्तर पश्चिम वाहिनी तट पर स्नान करके कुंभ स्नान का पुण्य अर्जित कर लेते हैं। लोगों की मान्यता है कि प्रयागराज कुंभ का पानी मौनी अमावस्या से सात दिन बाद यहां अचला सप्तमी को पहुंचता है। अचला सप्तमी पर गंगा स्नान का महत्व महाभारत में भी मिलता है। जब धर्मराज युधिष्ठिर को ब्रह्म दोष लगा तो उस समय भगवान श्री कृष्ण ने उनसे कहा कि आप अचला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को पड़ता है और उत्तर पश्चिम वाहिनी तट पर जाकर वहां स्नान करेंगे तो ब्रह्म दोष का पाप मिट जाएगा। उस समय तो मंगलवार नहीं पड़ा। यह पर्व कलयुग में मंगलवार को कभी-कभी पड़ता है। तभी श्रद्धालु भी यहां स्नान करते हैं। गंगा तट पर स्थित भगवान शंकर का पूजा पूजन अर्चन करने के साथ ही मां गंगा की आरती करते हैं। इस पर्व पर यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है। गंगा तट पर लाई-गट्टा, मिष्ठान, खिलौना, घर और गृहस्थी के सामान के स्टाल लगाए गए थे। स्नान-ध्यान के बाद लोग मेले का भ्रमण कर आनंद उठा रहे थे। मेंले में व्यवस्थापक समिति अध्यक्ष इंद्र कुमार चौबे, सुशील कुमार उपाध्याय, ग्राम प्रधान वीरेंद्र कुमार यादव, शीतला प्रसाद यादव सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा प्रशासन की तरफ से भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी मुस्तैद थे।