मिर्जापुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बाणसागर परियोजना का लोकार्पण करने के बाद सभा में कहा कि पानी हमारी अमूल्य संपदा है। इसकी एक-एक बूंद की बचत करनी होगी। कहा कि आप लोग मां की नगरी में रहने वाले है आप मुझे वचन दीजिए कि जैैैसे आप मां के प्रसाद के एक-एक कण को अमूल्य मानते हुए उसका उपयोग करते हैं उसी तरह बाण सागर परियोजना की शुरूआत के बाद सिंचाई के पानी के एक-एक बूंद को बचाएंगे। उन्होंने जनता का आह्वान किया है कि आप प्रतिज्ञा लीजिए कि हमें एक-एक बूंद पानी बचाना है। इंजीनियरों का कहना है कि बाणसागर नहर परियोजना से डेढ़ लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी लेकिन यदि आप पानी को प्रसाद मानकर इस्तेमाल करें तो दोगुने किसान सिंचाई का फायदा उठा सकते हैं। अगर आप पानी बचाते हैं तो इसका लाभ आपकी अगली पीढ़ी को मिलेगा। उन्होंने भाषण के दौरान का कि खेतों के मेड़ पर अक्सर लोग पेड़ लगाते हैं जो सिंचाई को प्रभावित करती है। इसकी जगह बांस लगाने की सलाह दी। लोग पहले मानते थे कि बांस पेड़ की प्रजाति का है। इसे काटने पर रोक है। हमने पता कराया तो पता चला कि बांस घास की प्रजाति है। इसे लगाने और काटने पर कोई रोक नहीं है। मेड़बंदी के लिए बांस का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। अचरज की बात है कि बांस भी विदेशों से आयात किया जाता है। कहा कि पूर्व की सरकारों में यूरिया के लोग रात भर लाइन में लगते थे। यूरिया के लिए लोगों को लाठी खानी पड़ती थी। पिछले चार में हालात काफी बदले हैं। उत्तर प्रदेश समेत सभी प्रदेशों में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है।