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आदिशक्ति के दरबार में पांच लाख भक्तों ने टेका मत्था

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विंध्याचल। नव वर्ष का आगमन, मंगलवार का दिन व एकादशी तिथि। ऐसा संयोग कभी-कभी आता है। ऐसे में कोई भक्त ऐसे मौका जाने नहीं देना चाहता। ऐसे में देश के कोने-कोने से आए करीब पांच लाख श्रद्धालुओं ने विंध्य दरबार में मत्था टेककर सुख समृद्घि की कामना की। देवी धाम में उमड़ी श्रद्घालुओं की भारी भीड़ के चलते विंध्य की सातों गलियां, सड़कें व गंगा घाट पटे रहे। नारियल-चुनरी, प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे भक्तों ने विधिवत मां के दिव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन कर मंगलकामना की।
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आदिशक्ति मां विंध्यवासिनी देवी के दरबार में मां की भव्य मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन करने का सिलसिला सुबह से देर रात तक चला। मंदिर में क्या छोटे, क्या बड़े, सभी मां के भव्य स्वरूप का दर्शन करने को लालायित दिखे। गंगा स्नान के बाद विंध्य धाम पहुंचे श्रद्घालुओं ने मंदिर पहुंच घंटों कतार में खड़े होकर गर्भगृह माता का विधिवत दर्शन पूजन किया। न्यू वीआईपी और पुरानी वीआईपी रोड सहित बच्चा पाठक गली, कोतवाली गली, जैपुरिया गली में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। कतार में माला-फूल व प्रसाद लेकर खड़े श्रद्घालु देवी मां का जयकारा लगाते मंदिर की तरफ बढ़े जा रहे थे। मां विंध्यवासिनी का दर्शन-पूजन करने के बाद भक्तों ने मंदिर परिसर में विराजमान मां सरस्वती, मां दुर्गा, मां काली, मां लक्ष्मी, मां शीतला श्री पंचमुखी महादेवजी, दक्षिणमुखी हनुमान, बटुक भैरव, डाक भैरव, लाल भैरव, काल भैरव सहित कई अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर बड़े ही श्रद्घाभाव से शीश झुकाया। इसी क्रम में भक्तजनों ने हवन कुंड व मंदिर के गुंबद की भी परिक्रमा की। गंगा घाटों पर जहां स्नान करने को स्नानार्थियों का रेला लगा रहा। वहीं, बड़ी संख्या में भक्तों ने अष्टभुजी पहाड़ पर त्रिकोण परिक्रमा कर पुण्य कमाया। देवीधाम में उमड़ी भक्तों की भीड़ को देखते हुए पुलिस व पीएसी के जवान सहित श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी मुस्तैदी से भक्तों की सेवा में डटे रहे।
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