चुनार। मौजी जियरा एसोसिएशन व चुनार साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को पांडेय बेचन शर्मा ‘उग्र’ की जयंती व मास्टर चुनारी लाल की पुण्यतिथि मनाई गई। गंगाघाट स्थित पांडेय बेचन शर्मा पुस्तकालय एवं वाचनालय में आयोजित कार्यक्रम में विद्वानों ने दोनों साहित्यकारों के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। साथ काव्य गोष्ठी में कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं का पाठ कर खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कृष्ण बिहारी द्विवेदी ने पांडेय बेचन शर्मा और मास्टर चुनारी लाल के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया। फिर कवि राजकुमार राजन ने ‘उग्र की उग्रता उजागर है, चुनारी लाल की कथा सागर है...’ सुनाकर काव्य गोष्ठी की शुरुआत की। इसके बाद त्राकेश राही ने चारों ओर भइले उजियार हो, आज के दिनवा यादगार हो... और राजेश मिश्र ज्योति ने उग्र की बगिया में एक से एक सितारे, जहां सरोवर में खिलते हैं कमल गुलाबी न्यारे... सुनाकर वाहवाही लूटी। अनवर अली अनवर ने कितना उन्होंने मेरा ख्याल रखा है, जैसे तोते को पाल रखा है... तो कमलेश्वर कमल ने उग्र की जयंती चुनारी की पुण्यतिथि, प्रकृति ने इस नगर को दे दिया है अद्भुत निधि... सुनाकर तालियां बटोरी। प्रियंवदा पांडेय की रचना तोहके चिठिया लिखत बानी बाबा, बाचि लिहा हमरो दुलार... को श्रोताओं ने खूब सराहा। इसके अलावा वरिष्ठ कवि राजेंद्र प्रसाद मिश्र, नयन वर्मा, कैलाशपति त्रिपाठी सरल, भरतलाल कंचन, डीके, अजूबा, शीतला पांडेय, शीतल गौरव, रामआसरे राव, जयप्रकाश आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। अध्यक्षता मेजर कृपाशंकर सिंह व संचालन वरिष्ठ कवि कमलेश्वर कमल ने किया। संगोष्ठी में शिवप्रसाद कमल, गणेश पांडेय, नरेंद्र पांडेय, नंदकिशोर तिवारी आदि ने अपने विचारों को रखा।