विंध्याचल। अक्षय नवमी 29 अक्तूबर को मनाई जाएगी। इस दिन लोग आंवला के पेड़ के नीचे परिवार के साथ खाना बनाते व खाते हैं। पं.त्रियोगी नारायण मिश्रा मिट्ठू ने बताया कि चरक संहिता में लिखा है कि अक्षय नवमी को महर्षि च्यवन ने आंवला खाया था, जिससे उन्हें पुन: नव यौवन प्राप्त हुआ था। इसी मान्यता के अनुसार लोग आज के दिन आंवला का सेवन करते हैं। शास्त्र के अनुसार आंवला का रस प्रतिदिन पीने से पुण्यों में बढ़ोत्तरी होती है और पाप नष्ट होते हैं।। पद्म पुराण के अनुसार इस दिन द्वापर युग की शुरूआत ह़ुई थी। अक्षय नवमी पर आंवला के वृक्ष के पूजन का बड़ा महत्व है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी में दान पुण्य करने से अन्य माह में पड़ने वाली नवमी से ज्यादा फलदायी होती है। इस दिन विधि विधान से पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है। आज के दिन आंवला वृक्ष के नीचे भोजन करने का विधान है। भोजन करने के दौरान अगर आंवला का एक भी पत्ता खाने में गिर जाए तो मंगल सूचक होता है। पुराणों के अनुसार भोजन करने के दौरान आने वाला वर्ष मंगल कामना लेकर आता है और आरोग्यता प्रदान करता है। इसका शुभारंभ देवी लक्ष्मी ने किया था। वैज्ञानिकता की बात करें तो आंवला का वृक्ष धरा का वो फल है, जिसमें विटामिन सी पाया जाता है। जलाकर राख कर देने के बावजश्ूद इसमें मौजूद रहने वाले विटामिन नही खत्म होता है। इस बार रविवार को अक्षय नवमी पड़ने के कारण कुछ लोग उसके पूर्व ही आंवला के पेड़ के नीचे भोजन कर रहे हैं।