सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक आते ही नहीं है। आएं भी कैसे उनको अपनी क्लीनिक से फुरसत ही नहीं मिलती। प्राइवेट प्रैक्टिस के खिलाफ मुख्यमंत्री के सख्त रवैए के बाद ऐसे चिकित्सकों में हड़कंप मचा हुआ है। बार-बार चेतावनी के बावजूद जो निजी क्लीनिक चलाने से बाज नहीं आ रहे हैं, ऐेसे डाक्टरों को चिह्नित किया जा रहा है। अब तक जिले में 19 डाक्टरों को चिह्नित कर उन पर कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने सरकारी अस्पतालों में तैनात डाक्टरों के निजी प्रैक्टिस पर पाबंदी को लागू करने का ऐलान किया है। नियमानुसार डाक्टर सरकारी नौकरी कर रहे डाक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें नान प्रैक्टिस भत्ता मिलता है। मुख्यमंत्री ने इस नियम को सख्ती से लागू करने का ऐलान करके निजी क्लीनिक चलाने वाले डाक्टरों की नींद उड़ा दी है। तमाम चिकित्सक ऐसे हैं जिन्होंने चिकित्सालय चला रहे हैं।
कुछ तो ड्यूटी पर आते ही नहीं और कुछ ड्यूटी के बाद जाकर अपनी क्लीनिक में मरीजों का इलाज करते हैं। शासन के निर्देेेश पर ऐसे डाक्टरों की चिन्हित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. ओम प्रकाश शाही ने अस्पताल में तैनात 19 डाक्टरों को चिह्नित किया है। इसके अलावा प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात तमाम चिकित्सक हैं जो निजी प्रैक्टिस करते हैं।